सोनभद्र जिले के 34 मतदान केंद्रों पर वाराणसी खंड के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। कुल 18,550 मतदाताओं में से 9,754 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतदान की प्रक्रिया और भागीदारी
मतदान सुबह आठ बजे शुरू होकर शाम चार बजे तक जारी रहा। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 16,812 मतदाताओं में से 8,442 ने वोट डाले, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के 1,738 मतदाताओं में से 1,312 ने मतदान किया। दोनों क्षेत्रों में कुल 50.21 प्रतिशत और 75.48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
मतदान के दौरान मतदाताओं में उत्साह देखा गया। सदर विधायक भूपेश चौबे ने अपनी पत्नी तृप्ति चौबे के साथ, वहीं पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा ने पत्नी अर्पिता कुशवाहा के साथ मतदान किया। राबर्ट्सगंज स्थित राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज समेत अन्य केंद्रों पर मतदाताओं की अच्छी उपस्थिति रही।
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा
मतदान केंद्रों पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी सतर्क रहे। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बूथ संख्या 256 (इंटर कॉलेज ओबरा) और 255 (विकासखंड चोपन) का अचानक निरीक्षण किया। सभी केंद्रों पर सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात थे। प्रशासन की निगरानी में मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
वाराणसी खंड के दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में सोनभद्र के अलावा चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही और बलिया जिले भी शामिल हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भी भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने पूर्व एमएलसी केदारनाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि सपा ने मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा पर भरोसा जताया है। 2020 के चुनाव में आशुतोष सिन्हा ने केदारनाथ सिंह को 3,850 मतों से हराया था। इस बार भाजपा पिछली हार का बदला लेने की कोशिश में है, जबकि सपा अपनी सीट बचाने को तैयार है।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा ने मौजूदा एमएलसी लाल बिहारी यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने डॉ. प्रमोद मिश्रा को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। 2020 में भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारा था और निर्दलीय चेतनारायण सिंह का समर्थन किया था। इस बार भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी होने से शिक्षक सीट पर मुकाबला और महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों दल अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में लगे हैं।


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