प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में इस कार्यक्रम के 12 वर्ष पूरे होने पर श्रोताओं का धन्यवाद किया और इसे एक तीर्थयात्रा के समान बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा समाज और राष्ट्र के लिए काम करने वाले नागरिकों के प्रयासों को समझने और देश के हर हिस्से से जुड़ने का अवसर रही है।
‘मन की बात’ की शुरुआत और उद्देश्य
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ‘मन की बात’ का पहला प्रसारण 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के दिन हुआ था। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के लोगों की मेहनत, साहस, समर्पण और सेवा भावना को सामने लाने का एक मंच मिला है। यह कार्यक्रम देश भर के नागरिकों की कहानियों और उनके योगदान को लोगों तक पहुंचाने का जरिया बना है।
तीर्थयात्रा की परंपरा और जनसेवा
पीएम मोदी ने भारत की सदियों पुरानी तीर्थयात्रा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ के जरिये उन्हें समाज में सेवा करने वाले लोगों के प्रयासों को समझने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि जनसेवा में लगे लोग खुद दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं।
समाजसेवा और समुदाय की कहानियां
पिछले वर्षों में ‘मन की बात’ ने उन व्यक्तियों और समुदायों के योगदान को उजागर किया है जो अक्सर नजरअंदाज रह जाते हैं। इस कार्यक्रम के जरिये समाज सेवा, समर्पण और सामुदायिक पहलों से जुड़ी कहानियां देश के कोने-कोने तक पहुंचीं हैं।
श्रोताओं से जुड़ाव और अपनत्व
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘मन की बात’ देश के परिवारों से जुड़ने का एक माध्यम भी बना है। कई श्रोताओं ने उन्हें बताया कि इस कार्यक्रम को सुनते समय वे प्रधानमंत्री के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस करते हैं। पीएम मोदी ने इस स्नेह और अपनत्व को बेहद अनमोल बताया।
प्रसारण माध्यम
‘मन की बात’ का प्रसारण आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) और दूरदर्शन नेटवर्क के माध्यम से होता है। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों के नागरिकों, सामाजिक पहलों और समुदायों के प्रयासों की कहानियां साझा की जाती हैं ताकि उनके काम और अनुभवों को व्यापक रूप से पहचाना जा सके।


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