भारत-चीन सीमा पर ITBP प्रमुख के बयान को लेकर विवाद के बीच केंद्र सरकार ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने कहा है कि भारत ने कोई जमीन नहीं छोड़ी है और सीमा पर नियंत्रण पूरी तरह भारतीय सेना के पास है।
ITBP प्रमुख के बयान का विवाद
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ITBP के प्रमुख के हवाले से कहा गया कि भारतीय सैनिक पूर्वी लद्दाख के पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी और विपक्ष ने सरकार से सवाल पूछना शुरू कर दिया कि क्या भारत ने अपनी जमीन गंवा दी है।
केंद्र सरकार का जवाब
सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए बताया कि जिन पेट्रोलिंग पॉइंट्स की बात हो रही है, वे दोनों देशों के बीच हुए डिसएंगेजमेंट समझौतों के तहत अस्थायी रूप से बफर जोन में आते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने अपनी जमीन छोड़ी है। यह तनाव कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि सीमा पर कुछ गश्ती बिंदुओं तक पहुंच को लेकर सुरक्षात्मक रणनीतियां अपनाई गई हैं, लेकिन इसे जमीन खोने या गश्त रोकने के रूप में नहीं देखना चाहिए। भारतीय सेना सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संसद में साफ किया कि जब तक चीन अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति पर लौटता नहीं, भारत के साथ सामान्य संबंध स्थापित नहीं होंगे। सरकार चीन के एकतरफा प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी।
LAC पर वर्तमान हालात
पूर्वी लद्दाख में लगभग चार साल बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। दोनों सेनाओं ने कई फ्लैशपॉइंट्स से पीछे हटकर डिसएंगेजमेंट किया है।
पैंगोंग त्सो में फरवरी 2021 में, ग्रा क में अगस्त 2021 में, गलवान घाटी में जून 2020 की झड़प के बाद, और पेट्रोलिंग पॉइंट-15 में सितंबर 2022 में सेनाएं पीछे हटीं।
डेपसांग और डेमचोक का मसला
डेपसांग मैदानों और डेमचोक में अभी भी कुछ पुराने मुद्दे बने हुए हैं, जहां भारतीय सेना को पारंपरिक गश्ती बिंदुओं तक पहुंचने में बाधाएं आ रही हैं। इन दोनों क्षेत्रों पर डिसएंगेजमेंट के लिए बातचीत जारी है।
बफर जोन बनाए गए हैं, जहां फिलहाल दोनों सेनाएं गश्त नहीं कर रही हैं।
सैन्य स्थिति और बुनियादी ढांचे का विकास
हालांकि कुछ जगह सेनाएं पीछे हटी हैं, लेकिन पूरी तरह डी-एस्केलेशन नहीं हुआ है। दोनों ओर 50,000-60,000 सैनिक, टैंक, तोपखाने और वायु रक्षा प्रणालियां तैनात हैं। सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन स्थिर बनी हुई है।
चीन सीमा के करीब बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, और भारत भी सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से विकास कर रहा है। सेला सुरंग जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
ITBP प्रमुख के बयान और सरकार की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि सीमा पर स्थिति जटिल है। डिसएंगेजमेंट के बावजूद तनाव खत्म नहीं हुआ है और पूर्ण शांति के लिए और वार्ताओं तथा विश्वास बहाली की जरूरत है।


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