कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल की अधिक मात्रा मिलने का खुलासा करते हुए तेल कंपनियों को चेतावनी दी है। जांच में बेंगलुरु और अन्य जिलों से लिए गए नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 31.2% तक पाई गई, जो वाहनों के इंजनों के लिए नुकसानदेह है। यह मामला अप्रैल 2023 के बाद बनी कारों के लिए भी चिंता का विषय है।
कर्नाटक में लैब जांच के नतीजे
कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री रिजवान अरशद ने बताया कि बेंगलुरु, कोलार, चिक्काबल्लापुरा, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से पेट्रोल के नमूने श्रीराम रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु में जांच के लिए भेजे गए। यह संस्थान NABL मान्यता प्राप्त और ISO प्रमाणित है।
जांच में इंडियन ऑयल के कुछ नमूनों में 31.2% इथेनॉल पाया गया। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सैंपलों में 30.5%, भारत पेट्रोलियम में 26.5%, नायरा में 26.1% तथा शेल में 25.5% तक इथेनॉल मिला।
सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि तेल कंपनियों की इन-हाउस लैबों ने अपनी रिपोर्ट में इथेनॉल की मात्रा का उल्लेख नहीं किया, जबकि यह अनिवार्य है।
इथेनॉल की अधिकता से वाहन और इंजन को खतरा
सरकार ने कहा कि देश की 99% गाड़ियां अत्यधिक इथेनॉल वाले ईंधन के लिए बनी नहीं हैं। अप्रैल 2023 के बाद बनी E20-कम्प्लाइंट कारें भी केवल 20% तक इथेनॉल सहन कर सकती हैं।
इथेनॉल की अधिक मात्रा से वाहन का माइलेज घट सकता है और फ्यूल पंप, इंजेक्टर, फिल्टर, होज व इंजन सील जैसे पुर्जों को नुकसान पहुंच सकता है। सरकार ने सवाल उठाया है कि क्या वाहन निर्माता इस तरह के खराब ईंधन से हुए नुकसान की वारंटी देंगे।
सरकार की दो मुख्य मांगें
कर्नाटक सरकार ने केंद्र और तेल कंपनियों से दो मांगें रखी हैं। पहला, सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन में इथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए ताकि उपभोक्ता जान सकें। दूसरा, 'E20 स्पॉइलेज फंड' बनाया जाए, जिससे अत्यधिक इथेनॉल वाले ईंधन से हुए नुकसान का मुआवजा वाहन मालिकों को दिया जा सके।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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