संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में युद्ध और संघर्षों में मारे जाने वाले हर चार आम लोगों में से एक महिला या लड़की थी. यह जानकारी 26 अक्टूबर को जारी हुई 'महिला, शांति और सुरक्षा' पर 2026 की रिपोर्ट में सामने आई है, जो महिलाओं पर युद्ध के प्रभाव को दर्शाती है.
मुख्य तथ्य
- 2025 में युद्ध में मारे गए 37,000 से ज्यादा आम लोगों में हर चौथा महिला या लड़की था।
- लगभग 75 करोड़ महिलाएं युद्ध प्रभावित इलाकों के 50 किलोमीटर के दायरे में रहती हैं।
- युद्ध से जुड़े यौन हिंसा के मामले 2022 से 2025 के बीच चार गुना बढ़े।
- शांति वार्ता में महिलाओं की भागीदारी 2025 में केवल 5 प्रतिशत रही।
- 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
युद्ध में महिलाओं की मौत और जीवन पर प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में युद्ध में मारे गए प्रत्येक चार आम लोगों में से एक महिला या लड़की थी, जो 2021 की तुलना में दोगुना है। युद्ध प्रभावित इलाकों के आसपास रहने वाली महिलाओं की संख्या 1990 के बाद सबसे ज्यादा पहुंच गई है। करीब 750 मिलियन यानी 75 करोड़ महिलाएं और लड़कियां ऐसे इलाकों के 50 किलोमीटर के दायरे में रहती हैं जहां लड़ाई जारी है।
युद्ध के कारण महिलाओं को यौन हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और इस तरह के मामले 2022 से 2025 के बीच लगभग चार गुना बढ़ गए हैं। इसके अलावा, लगभग 17 करोड़ महिलाएं और लड़कियां युद्ध प्रभावित इलाकों में रोजाना 3 डॉलर से भी कम में जीवन यापन कर रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र महिला की कार्यकारी निदेशक सीमा बाहौस ने बताया कि युद्ध में फंसी महिलाओं की संख्या पिछले कई दशकों की तुलना में सबसे अधिक है। उन्होंने ड्रोन, लंबी दूरी के हथियारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई सैन्य तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता जताई है, क्योंकि यह आम लोगों के लिए खतरा बढ़ा रहा है।
शांति वार्ता में महिलाओं की कम भागीदारी
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 2025 में दुनिया की 57 शांति प्रक्रियाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 5 प्रतिशत थी, जो 2024 के 7 प्रतिशत से कम है। जबकि महिलाएं युद्ध प्रभावित समुदायों की सुरक्षा और सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, उन्हें इस प्रक्रिया में पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है।
इसी दौरान, वैश्विक सैन्य खर्च 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो लगातार बढ़ रहा है। इसके विपरीत, युद्ध प्रभावित इलाकों में काम करने वाले महिला संगठनों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत ऐसे संगठन डर रहे हैं कि उन्हें अगले एक साल में अपना काम बंद करना पड़ सकता है। ये संगठन महिलाओं को सुरक्षा, यौन हिंसा की सहायता और विवाद समाधान में मदद करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के सुझाव और मांगें
संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध प्रभावित इलाकों में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कड़ाई से लागू करने और महिलाओं के नेतृत्व वाले शांति प्रयासों को लगातार फंडिंग देने की मांग की है।
रिपोर्ट में सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से शांति और सुरक्षा से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि जब महिलाओं पर युद्ध का बोझ बढ़ रहा है, तब उन्हें शांति स्थापना प्रक्रिया से बाहर रखना समस्या को और बढ़ा सकता है।
समयरेखा
- 1990: युद्ध प्रभावित इलाकों के आसपास महिलाओं की संख्या में वृद्धि शुरू।
- 2021: युद्ध में मारी गई महिलाओं की संख्या का पहला उल्लेख।
- 2022-2025: यौन हिंसा के मामले लगभग चार गुना बढ़े।
- 2024: महिलाओं की शांति वार्ता में हिस्सेदारी 7 प्रतिशत।
- 2025: युद्ध में मारे गए हर चार लोगों में से एक महिला, शांति वार्ता में महिलाओं की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत, सैन्य खर्च 2.9 ट्रिलियन डॉलर।
स्रोत: tv9hindi.com


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