इजरायल में 1 नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री पद के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक भविष्य दांव पर है। नेतन्याहू के सामने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और पूर्व इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) प्रमुख गादी आइजनकोट जैसी प्रमुख हस्तियां चुनौती दे रही हैं। चुनाव के परिणाम देश की अगली राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
चुनावी मुद्दों और मतदान की स्थिति
इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं, और बहुमत सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। इस बार चुनाव मुख्य रूप से गाजा और हमास पर कार्रवाई, देश की सुरक्षा, सैन्य सेवा और न्यायिक सुधार जैसे विषयों पर केंद्रित है। चुनाव आयोग के अनुसार, दोपहर 2 बजे तक देश में 45 प्रतिशत मतदान हो चुका था, जो इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान है। पिछले रिकॉर्ड 79.9 प्रतिशत का था, जिसे इस बार तोड़ा जा सकता है।
नेतन्याहू का मुस्लिम इलाकों में बढ़ती वोटिंग पर बयान
नेतन्याहू ने मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें साझा करते हुए समर्थकों से अधिक मतदान करने की अपील की। उन्होंने अपने एक पोस्ट में कहा कि मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक मतदान केंद्रों पर भारी संख्या में पहुंच रहे हैं और चुनाव जीतने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम अपने घर के लिए जंग लड़ रहे हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वे जागे नहीं तो मंसूर अब्बास और अहमद तिबी की सरकार बन जाएगी। नेतन्याहू ने कहा कि समर्थकों को अपने परिवार और दोस्तों को फोन कर मतदान केंद्र ले जाना चाहिए और ‘मचल’ को वोट देना चाहिए।
वोटिंग केंद्रों पर लंबी कतारें और दक्षिणपंथी इलाकों की स्थिति
नेतन्याहू ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि बसें मतदान केंद्रों की ओर जा रही हैं और अरब बस्तियों में लंबी कतारें लग रही हैं। इसके विपरीत, दक्षिणपंथी गढ़ों में अभी कोई खास गतिविधि नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वे वोटिंग के लिए नहीं निकले तो अरब पार्टियों की सरकार बन जाएगी। नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि हर वोट महत्वपूर्ण है और घर पर बैठना सही नहीं होगा। उनकी अपील है कि सभी तुरंत बाहर निकलें और मचल को वोट दें क्योंकि यह "हमारे घर को बचाने की लड़ाई" है।
ओपिनियन पोल में गादी आइजनकोट को बढ़त
चार में से छह ओपिनियन पोल में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के गठबंधन को ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि नेतन्याहू को केवल एक पोल में बढ़त मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इजरायल की संसद में अब तक किसी भी पार्टी ने पूर्ण बहुमत नहीं पाया है, इसलिए गठबंधन सरकार बनाना होगा। इस चुनाव में भी कोई स्पष्ट बहुमत नहीं दिख रहा।
स्रोत: livetimes.news


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