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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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LAC गश्त विवाद पर भारत और चीन के बयान और कूटनीतिक प्रयास

भारत-चीन LAC गश्त विवाद में दोनों पक्षों के बयान और कूटनीतिक संवाद जारी रखने पर जोर।

LAC गश्त विवाद पर भारत और चीन के बयान और कूटनीतिक प्रयास

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त को लेकर फिर से बयानबाजी तेज हो गई है। अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर भारत के आरोपों के जवाब में चीन ने पलटवार किया है। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भारत के आरोपों को घरेलू राजनीति से जोड़ा है।

चीन के विदेश मंत्रालय का बयान

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को कहा कि चीन दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन करता है। उन्होंने बताया कि चीनी सेना सीमा क्षेत्रों में अपनी संप्रभुता और स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य गश्त करती है। गुओ ने भारत से अपील की कि वह सीमा पर बनी सहमति को लागू करे और शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम करें। यह बयान तब आया है जब अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर भारत ने सवाल उठाए हैं।

भारत ने क्या कहा?

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति तब बिगड़ती है, जब चीन स्थापित गश्ती पैटर्न से हटता है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए जरूरी है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर भी अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की घटनाओं की जानकारी दे चुके हैं। भारत का मानना है कि सीमा पर तनाव द्विपक्षीय संबंधों के सुधार में बाधा बन सकता है।

ग्लोबल टाइम्स ने क्या कहा?

चीन के मीडिया संस्थान ग्लोबल टाइम्स ने सीमा विवाद पर भारत के आरोपों को लेकर कहा कि इनके समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उन्होंने इसे भारत की घरेलू राजनीति से जुड़ा रणनीतिक कदम बताया। कियान फेंग, जो सिंघुआ विश्वविद्यालय के नेशनल स्ट्रैटेजी इंस्टीट्यूट में रिसर्च विभाग के निदेशक हैं, ने कहा कि सीमा विवादों को द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों से मौजूदा समझौतों का पालन करने और नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू करने की अपील की।

क्या सैन्य और कूटनीतिक संवाद जारी रहेंगे?

कियान फेंग ने कहा कि दोनों देशों को संवाद जारी रखना चाहिए ताकि गलतफहमियां दूर हों और मतभेद नियंत्रित रहें। उन्होंने सुझाव दिया कि सीमा विवादों को स्थापित बातचीत तंत्र के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, जिसमें विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता शामिल है।

गलवान संघर्ष के बाद संबंधों की स्थिति

वर्ष 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़पों के बाद भारत-चीन संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। तब से सीमा प्रबंधन और सैन्य तैनाती को लेकर गतिरोध बना हुआ था। हालांकि हाल के समय में दोनों देशों ने संबंध सुधारने और तनाव कम करने के प्रयास किए हैं। फिर भी अरुणाचल प्रदेश में गश्त को लेकर उठाए गए आरोप यह दर्शाते हैं कि सीमा प्रबंधन के मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं। वर्तमान विवाद में दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। इसलिए सीमा पर स्थिरता के लिए प्रभावी संवाद, समझौतों का पालन और जमीनी समन्वय आवश्यक होंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • चीन ने भारत के आरोपों को बेबुनियाद और घरेलू राजनीति से जोड़कर खारिज किया।
  • भारत ने कहा कि चीनी सैनिक स्थापित गश्ती पैटर्न से हट रहे हैं।
  • गलवान घाटी की 2020 की झड़पों के बाद सीमा पर तनाव बना हुआ है।
  • दोनों देशों ने कूटनीतिक और सैन्य संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है।

स्रोत: deshbandhu.co.in

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