इजराइल के हाल के चुनावों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को संसद में मात्र 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन को 67 सीटें हासिल हुई हैं। इसके बावजूद, नेतन्याहू अब भी प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की संभावना बनाए हुए हैं क्योंकि विपक्षी दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर मतभेद हैं।
मुख्य तथ्य
- नेतन्याहू के गठबंधन को संसद में 53 सीटें मिलीं।
- विपक्षी गठबंधन के पास 67 सीटें हैं, जिसमें अरब पार्टियां भी शामिल हैं।
- अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टी UTJ के 7 सांसद हैं, जिनका समर्थन नेतन्याहू के लिए महत्वपूर्ण।
- सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत जरूरी है।
- राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग सरकार बनाने के लिए 28 दिन दे सकते हैं, आवश्यकता पड़ने पर 14 दिन और मिल सकते हैं।
नेतन्याहू की सरकार बनने की संभावना
नेतन्याहू के गठबंधन के पास बहुमत के लिए 8 सीटें कम हैं। उन्हें छोटे दलों या विपक्ष के कुछ सांसदों का समर्थन लेना होगा। खासतौर पर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) के 7 सदस्य हैं, जो इस चुनाव में नेतन्याहू के समर्थन में नहीं आए। यदि नेतन्याहू UTJ को वापस अपने साथ जोड़ पाते हैं, तो उन्हें केवल एक और सांसद का समर्थन चाहिए होगा, जिससे वह बहुमत पा सकते हैं।
विपक्षी गठबंधन और अरब पार्टियों का समर्थन विवादित
विपक्ष के नेता गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को कुल 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं। अरब पार्टियों के समर्थन से आइजेनकोट के पक्ष में 67 सांसदों का आंकड़ा बनता है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद हैं। यह असहमति विपक्ष के लिए सरकार बनाने की प्रक्रिया को जटिल बना रही है, जिससे नेतन्याहू को फायदा हो सकता है।
सरकार बनाने की प्रक्रिया और राष्ट्रपति का रोल
राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग पहले आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके लिए उन्हें 28 दिन मिलेंगे। जरूरत पड़ने पर यह अवधि 14 दिन और बढ़ाई जा सकती है। यदि आइजेनकोट बहुमत हासिल करने में असफल रहते हैं, तो राष्ट्रपति दूसरे सांसद को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं। इस स्थिति में नेतन्याहू भी उम्मीदवार बन सकते हैं।
राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प
नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार बनने की संभावना भी बनी हुई है। इस तरह की सरकार में प्रधानमंत्री पद साझा किया जा सकता है, जिसमें रोटेशन फॉर्मूला के तहत दोनों नेता समय-समय पर प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। हालांकि, आइजेनकोट ने पहले ही नेतन्याहू के नेतृत्व में सरकार बनाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इसलिए, इस विकल्प को साकार करने के लिए दोनों नेताओं को अपने रुख में बदलाव करना होगा।
अगर सरकार नहीं बनी तो क्या होगा?
यदि सभी प्रयास असफल रहते हैं, तो इजराइल में दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस (CRS) के मुताबिक, सरकार बनाने की पहली नाकामी के बाद दूसरे और तीसरे सांसद को भी मौका दिया जाएगा। तब भी यदि बहुमत नहीं बनता है, तो संसद भंग हो जाएगी और नए चुनाव होंगे। तब तक नेतन्याहू की सरकार कार्यवाहक सरकार के रूप में काम करती रहेगी, और वह प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
स्रोत: tv9hindi.com


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