नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली बस्ते का वजन बच्चे के शरीर के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए। केरल सरकार ने स्कूली बस्ते का वजन कम करने के लिए एक रुपरेखा तैयार की है और 24 नवंबर को इस विषय पर बैठक आयोजित करने जा रही है।
24 नवंबर को बैठक
केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन शमसुद्दीन ने बताया कि राज्य सरकार स्कूली छात्रों के बस्ते का वजन घटाने के उपायों पर चर्चा के लिए 24 नवंबर को बैठक करेगी। इस बैठक में पाठ्यपुस्तकों की छपाई और वितरण बदलाव के विकल्पों पर भी विचार होगा। मंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में विधायक केके वलसराज के अनुरोध के जवाब में दी, जिसमें हाईस्कूल के छात्रों के भारी बस्ते की समस्या को उठाया गया था।
मासिक या छमाही आधार पर किताबें छप सकती हैं
शमसुद्दीन ने कहा कि स्कूली बस्ते के वजन को कम करने के लिए सिलेबस को मासिक या छमाही आधार पर व्यवस्थित कर किताबें छापने पर विचार किया जा रहा है। इससे छात्रों के बस्ते का वजन कम होगा। इसके अलावा, किताबें छपाने के लिए हल्के कागज का उपयोग करने की संभावना भी विभाग देख रहा है।
स्कूली बस्ते का वजन कितना होना चाहिए?
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, स्कूली बस्ते का वजन बच्चे के कुल वजन का 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि बच्चे का वजन 30 किलो है, तो बस्ता 3 किलो से भारी नहीं होना चाहिए। क्लास वाइज वजन इस प्रकार है:
- प्री-प्राइमरी: कोई बस्ता नहीं
- 1वीं और 2वीं: 1.6 से 2.2 किलोग्राम
- 3वीं से 5वीं: 1.7 से 2.5 किलोग्राम
- 6वीं और 7वीं: 2 से 3 किलोग्राम
- 8वीं: 2.5 से 4 किलोग्राम
- 9वीं और 10वीं: 2.5 से 4.5 किलोग्राम
- 11वीं और 12वीं: 3.5 से 5 किलोग्राम
बैगलेस डे और वजन मापने की मशीन
सरकार स्कूली बस्ते के बढ़ते वजन को लेकर चिंतित है। इसी कारण केंद्र सरकार ने हर साल 10 दिन "बैगलेस डे" आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूलों में बस्ते का वजन मापने के लिए मशीन लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि बच्चों के लिए भारी बस्ते की समस्या को रोका जा सके।


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।