बिहार सरकार ने अपने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को और आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) की ट्रेनिंग देने के लिए 11 आईटी कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों की डिजिटल क्षमताओं को बढ़ाना और कक्षा में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है। साथ ही, कक्षा 6 से कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की योजना भी बनाई जा रही है।
11 IT कंपनियां देंगी शिक्षकों को ट्रेनिंग
बिहार के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए 11 आईटी कंपनियों के साथ करार किया है, जिसमें गूगल एजुकेशन भी शामिल है। इस प्रोग्राम के तहत शिक्षकों को सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे डिजिटल कौशल सिखाना है, जिनका वे कक्षा में पढ़ाने के दौरान इस्तेमाल कर सकें। इस पहल में केंद्र सरकार के कौशल विकास विभाग का भी सहयोग रहेगा। इससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनेगी।
SCERT परिसर में बनेगा ट्रेनिंग सिस्टम
शिक्षा विभाग राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के परिसर में एक केंद्रीकृत प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित कर रहा है। यहां आईटी कंपनियां अलग-अलग बैच में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेंगी। स्कूलों के प्रधानाचार्य शिक्षकों का चयन और नामांकन इस प्रोग्राम के लिए करेंगे।
ट्रेनिंग में न केवल सैद्धांतिक ज्ञान दिया जाएगा, बल्कि तकनीक के व्यावहारिक उपयोग पर भी जोर होगा। इससे शिक्षक डिजिटल टूल्स की मदद से पढ़ाई को आसान और प्रभावी बना सकेंगे।
कक्षा 6 से कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य
राज्य सरकार अगले अकादमिक सत्र से सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। इसके लिए स्कूलों में आईटी से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, शिक्षकों के प्रशिक्षण में AI पर खास ध्यान दिया जाएगा ताकि पढ़ाने के तरीकों में सुधार हो और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़े।
700 मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम
पहले चरण में बिहार सरकार 700 मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करेगी। इन स्कूलों में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ आवश्यक तकनीकी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
शुरुआती अनुभव और सफलता के आधार पर इस व्यवस्था को अन्य सरकारी स्कूलों तक चरणबद्ध तरीके से फैलाया जाएगा। इससे छात्रों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिलेगा और वे भविष्य की तकनीकों को बेहतर समझ सकेंगे।


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