जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव की घोषणा हुई है। लंबे समय से बंद छात्रसंघ को फिर से बहाल करने की तैयारी चल रही है। जानिए छात्रसंघ क्यों भंग हुआ था और आखिरी चुनाव में कौन-कौन पदाधिकारी थे।
जामिया में छात्रसंघ चुनाव का इतिहास
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई थी, जिसे बाद में करोलबाग और फिर ओखला के मौजूदा परिसर में स्थानांतरित किया गया। 1988 में जामिया को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। यहां पहला छात्रसंघ चुनाव 1981 में हुआ था, जिसमें जुबैर खान पहले अध्यक्ष चुने गए थे। उसी चुनाव में रिजवान अली खानी उपाध्यक्ष, आफताब अहमद महासचिव और जलालुद्दीन संयुक्त सचिव बने थे।
छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध और भंग
जामिया में छात्रसंघ चुनाव 12 साल तक नियमित रूप से होते रहे, लेकिन 1990 में चुनाव नहीं हुए और 1996 में छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रशासन का मानना था कि छात्रसंघ के पदाधिकारी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में दखल दे रहे थे, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा था।
फिर 2005 में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव हुए और जुलाई 2005 में नया छात्रसंघ निर्वाचित हुआ। लेकिन 31 मार्च 2006 को छात्रसंघ को भंग कर दिया गया और चुनावों पर रोक लग गई। इसका कारण छात्रसंघ से जुड़ी हिंसक घटनाएं और पढ़ाई में व्यवधान थे। कॉलेज दो दिन तक बंद भी रहा था।
छात्रसंघ भंग करने के पीछे की वजहें
जामिया प्रशासन ने हिंसा और पढ़ाई में व्यवधान को कारण बताते हुए छात्रसंघ को भंग किया। राज्यसभा में भी बताया गया था कि कुलपति पर हमले जैसे घटनाओं के बाद यह कदम उठाया गया। इसके बाद छात्रसंघ बहाल नहीं हुआ और चुनाव पर रोक जारी रही। स्टूडेंट्स ने कई बार चुनाव कराने की मांग की, पर मामला कोर्ट में जाने के बाद भी कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। 2017 से विषय संघ चुनाव आयोजित होते रहे।
आखिरी छात्रसंघ के अध्यक्ष और पदाधिकारी
2005 में हुए आखिरी छात्रसंघ चुनाव में शम्स परवेज अध्यक्ष चुने गए थे, जो अब बिहार की पूर्णिया यूनिवर्सिटी के अररिया कॉलेज में भूगोल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उपाध्यक्ष के रूप में मुहम्मद फहीम हैदर खान, महासचिव के रूप में फरहत अली और संयुक्त सचिव के रूप में जिल्ले सुभानी निर्वाचित हुए थे। इन पदाधिकारियों के वर्तमान कार्य के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।


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