जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्र लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 12 अक्टूबर से शुरू हुए इस आंदोलन में कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की घोषणा के बाद जामिया के छात्रों में भी उम्मीद जगी है। प्रशासन ने बातचीत के लिए समिति बनाई है और छात्र संघ संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
AMU से प्रेरणा मिली
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में करीब आठ साल बाद छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा ने जामिया के छात्रों को आंदोलन तेज करने की प्रेरणा दी। AMU में करीब 20 दिनों की भूख हड़ताल और प्रदर्शन के बाद 5 नवंबर को मतदान तय किया गया। इसी के बाद जामिया के छात्र भी अपनी मांगों को लेकर अधिक सक्रिय हो गए। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ होना जरूरी है ताकि वे अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा सकें।
छात्र संघ चुनाव कब से बंद हैं?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव का इतिहास पुराना है। जानकारी के अनुसार, 1996 के बाद दिसंबर 2005 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। उस वक्त कुलपति मुशीरुल हसन ने चुनाव की अनुमति दी थी। लेकिन 31 मार्च 2006 को छात्र संघ कार्यालय को सील कर दिया गया और तब से चुनाव नहीं हुए। करीब दो दशक से चुनाव न होने के कारण यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।
12 अक्टूबर से भूख हड़ताल शुरू
12 अक्टूबर 2026 से छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर गेट नंबर 7 के पास विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। इंटरनेशनल स्टडीज के छात्र जासिम खान और बीए एलएलबी के छात्र एबिन बासिल पहले दिन से भूख हड़ताल पर बैठे। चार दिन बाद मास्टर्स ऑफ सोशल वर्क के रेहान हैदर और बीए ऑनर्स जियोग्राफी के रेहान खान भी शामिल हुए।
17 अक्टूबर को छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मियों ने जबरन उन्हें परिसर से बाहर निकाला और कैंपस बंद कर दिया। इसके बाद छात्रों का समर्थन बढ़ा और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
नारों ने विवाद बढ़ाया
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘RSS Go Back’, ‘Free Kashmir’, ‘Free Sharjeel Imam’ और ‘VC Go Back’ जैसे नारे लिखे गए। इन नारों को किसने लिखा, स्पष्ट नहीं है। इस मामले ने आंदोलन को नया विवाद दिया। कुछ छात्रों ने नारों पर आपत्ति जताई, जबकि प्रशासन ने चिंता व्यक्त की।
ऑनलाइन कक्षाएं लागू
छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तनाव बढ़ने के कारण प्रशासन ने सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में संचालित करने का फैसला लिया।
राजनीतिक समर्थन
आंदोलन में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और लोकसभा सांसद इमरान मसूद छात्रों के समर्थन में जामिया पहुंचे। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी भी छात्रों से मिलने आए। इमरान मसूद को 23 अक्टूबर की रात पुलिस ने हिरासत में लेने की कोशिश की।
प्रशासन ने इमरान प्रतापगढ़ी, इमरान मसूद और अन्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी कि वे बिना अनुमति परिसर में घुसे और अशांति फैलाई। इस पर FIR दर्ज की गई है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- छात्र संघ चुनाव की बहाली और चुनाव की तारीख तय करना।
- प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ निलंबन और नोटिस वापस लेना।
- सुरक्षा सलाहकार और प्रॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई जो छात्रों के साथ गलत व्यवहार के आरोपों के कारण।
छात्र चाहते हैं कि प्रशासन लिखित में स्पष्ट समयसीमा बताए और केवल आश्वासन न दे।
प्रशासन की पहल और समिति
18 अक्टूबर को प्रशासन ने सात सदस्यीय समिति बनाई और छात्रों से बातचीत की। हालांकि, बैठक के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हुए। 21 अक्टूबर को कुलपति की अध्यक्षता में छात्र संघ संविधान तैयार करने के लिए अलग समिति बनाई गई। भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की सेहत के लिए मेडिकल टीम भी तैनात की गई।
26 अक्टूबर का प्रशासनिक फैसला
26 अक्टूबर को प्रशासन ने आदेश जारी किया कि छात्र संघ का संविधान मंजूर होने के 15 दिन बाद चुनाव होंगे। साथ ही, निलंबन और नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए समिति बनाने की बात कही गई। लेकिन संविधान की मंजूरी की तारीख तय न होने से छात्र इसे अधूरा आश्वासन मान रहे हैं।
छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट समयसीमा नहीं दी जाती, आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन ने चुनाव की पहल की है, पर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।
आगे का रास्ता
अब छात्र संघ चुनाव के संविधान की मंजूरी और चुनाव प्रक्रिया की समयसीमा सभी की नजर में है। अगर जल्द मंजूरी मिलती है तो करीब दो दशक बाद जामिया में चुनाव हो सकते हैं। हालांकि, आंदोलन समाप्त करने और सभी पक्षों में सहमति बनाने की चुनौती बनी हुई है।


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