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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
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ऑस्कर क्लेन मेडल पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बने अशोक सेन

अशोक सेन ऑस्कर क्लेन मेडल जीतने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बने, स्ट्रिंग थ्योरी और ब्लैक होल पर किया महत्वपूर्ण शोध।

ऑस्कर क्लेन मेडल पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बने अशोक सेन

भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर अशोक सेन को थियोरेटिकल फिजिक्स के क्षेत्र में प्रतिष्ठित ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है। वे इस मेडल को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक बन गए हैं। उनके शोध का मुख्य क्षेत्र स्ट्रिंग थ्योरी, ब्लैक होल और ब्रह्मांड के मूलभूत नियम हैं।

अशोक सेन को मिला ऑस्कर क्लेन मेडल

ICTS बेंगलुरु के प्रोफेसर अशोक सेन को उनके थियोरेटिकल फिजिक्स में योगदान के लिए ऑस्कर क्लेन मेडल से नवाजा गया है। यह सम्मान स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल कमेटी द्वारा 1988 से दिया जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ अशोक सेन इस मेडल को जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। सम्मान के अवसर पर उन्होंने स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी में "ग्रेविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रेविटी" विषय पर व्याख्यान भी दिया।

स्ट्रिंग थ्योरी पर शोध

प्रोफेसर सेन को स्ट्रिंग थ्योरी पर उनके महत्वपूर्ण शोध के लिए जाना जाता है। स्ट्रिंग थ्योरी ब्रह्मांड के फंडामेंटल पार्टिकल्स और शक्तियों को समझने में मदद करती है। यह सिद्धांत गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम फिजिक्स के नियमों को एक साथ समझने की चुनौती को दूर करने का प्रयास करता है।

मॉर्डन फिजिक्स में योगदान

अशोक सेन ने एस-ड्यूअलिटी, स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी और ब्लैक होल से जुड़ी गणनाओं पर महत्वपूर्ण काम किया है। उनकी रिसर्च ने आधुनिक भौतिकी की समझ को और गहरा किया है।

पहले भी मिले कई सम्मान

ऑस्कर क्लेन मेडल के अलावा अशोक सेन को डिरैक मेडल और ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं। भारतीय वैज्ञानिक दीपक धर को भी डिरैक मेडल से सम्मानित किया गया है, जबकि भारतीय मूल के भौतिक विज्ञानी जैनेंद्र जैन को वुल्फ प्राइज मिल चुका है। ये पुरस्कार भारतीय वैज्ञानिकों की वैश्विक स्तर पर मजबूत उपस्थिति को दर्शाते हैं।

अशोक सेन का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अशोक सेन का जन्म 1956 में कोलकाता में हुआ था। उनके पिता स्कॉटिश चर्च कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर थे। उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीएससी किया और फिर IIT कानपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद अमेरिका जाकर स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और फर्मिलैब में भी कार्य किया।

भारत लौटने के बाद की उपलब्धियां

अशोक सेन भारत लौट कर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) से जुड़े। 1995 में उन्होंने प्रयागराज के हरीश चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम शुरू किया। उनका सफर यह दर्शाता है कि जिज्ञासा, मेहनत और समर्पण से विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

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