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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, PoK खाली करने की मांग

संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर, अल्पसंख्यक अधिकार और जलवायु न्याय पर तीखी बहस हुई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, PoK खाली करने की मांग

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, अल्पसंख्यक अधिकारों और जलवायु न्याय पर तीखी बहस हुई। भारत ने पाकिस्तान को PoK खाली करने की दोबारा मांग की और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाक को कश्मीर और PoK पर घेरा

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी हुई। भारत के स्थायी मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी राघू पुरी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। उन्होंने पाकिस्तान से उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्र, यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK), को खाली करने की मांग दोहराई। पुरी ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपनी सरकार के नागरिकों की भलाई और वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों पर ध्यान देना चाहिए।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भारत ने सवाल उठाए

भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी भाविका मंगलानंदन ने संयुक्त राष्ट्र के धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक के साथ चर्चा के दौरान एक रिपोर्ट के दृष्टिकोण पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान धार्मिक भेदभाव से जुड़ी रिपोर्ट में विकासशील देशों पर अधिक ध्यान दिया गया, जबकि विकसित देशों में हुई ऐसी घटनाओं को पर्याप्त रूप से नहीं देखा गया।

राघू पुरी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा संबंधित देश की संप्रभु जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों को संविधान से मिले संरक्षण को भी रेखांकित किया।

जलवायु न्याय और स्वतंत्र न्यायपालिका पर भारत का रुख

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उप सचिव बरखा ताम्रकार ने कहा कि जलवायु संकट विकास, आजीविका और मानवाधिकारों को प्रभावित करने वाली गंभीर वैश्विक चुनौती है। उन्होंने जलवायु न्याय, समानता और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

भारत ने संविधान, पर्यावरण कानूनों, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका पर जोर दिया। न्यायिक प्रशिक्षण और संस्थागत व्यवस्थाओं के जरिए न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को मजबूत करने के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी गई।

इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत ने पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और न्यायिक व्यवस्था पर भी अपना पक्ष मजबूती से रखा।

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