आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मानसिक तनाव और डिप्रेशन एक आम समस्या बन चुके हैं। हाल ही में हुई एक शोध स्टडी ने बताया है कि रोजाना एक गिलास 100% फलों का जूस या स्मूदी पीने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है और डिप्रेशन के स्तर में कमी आ सकती है।
जूस से मूड में सुधार
यूके की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक चार सप्ताह के ट्रायल में 42 वयस्कों पर अध्ययन किया, जिनका फल और सब्जियों का सेवन कम था। उन्हें दो ग्रुपों में बांटा गया। पहले ग्रुप को केवल साबुत फल और सब्जियां दी गईं, जबकि दूसरे ग्रुप को इसके साथ रोजाना एक गिलास फलों का जूस या स्मूदी भी दिया गया।
ट्रायल के बाद पाया गया कि जो लोग फलों के जूस या स्मूदी के साथ अपनी डाइट बढ़ा रहे थे, उनमें डिप्रेशन के लक्षण अधिक कम हुए। उनके डिप्रेशन स्कोर में औसतन 2.52 पॉइंट की कमी आई, जो कि सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण है।
‘5-ए-डे’ लक्ष्य और फलों का जूस
यूके की ‘5-a-day’ गाइडलाइन के अनुसार रोजाना पांच बार फल और सब्जियां खाना जरूरी है, लेकिन केवल 17% वयस्क और कम किशोर इसे पूरा करते हैं। इस अध्ययन ने दिखाया कि रोजाना एक गिलास जूस या स्मूदी पीना इस लक्ष्य तक पहुँचने में सरल और किफायती तरीका हो सकता है।
डॉ. कर्टनी नील ने कहा, “हमने पाया कि जूस पीना आसान उपाय है, जिससे लोग अपनी डाइट में सुधार कर सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकते हैं।”
फाइबर और स्वास्थ्य पर असर
अध्ययन के दौरान दोनों ग्रुप के लोगों की डाइट में फाइबर की मात्रा 8-10 ग्राम तक बढ़ी, जिसका मतलब है कि जूस पीने के बावजूद वे साबुत फल और सब्जियां भी खाते रहे। इसके अलावा, मेटाबोलिक हेल्थ पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया।
शोधकर्ता क्या कहते हैं?
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के डॉ. ओलिवर शैनन ने बताया, “जीवन यापन की महंगाई और ताजे फल-सब्जियों की कीमतें लोगों के लिए बाधा हैं। रोजाना एक गिलास जूस इस समस्या का समाधान हो सकता है।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में और गहन शोध की जरूरत है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका मानसिक स्वास्थ्य खराब है।
अध्ययन की प्रक्रिया
42 प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांटा गया। एक समूह को सामान्य खान-पान जारी रखने को कहा गया, दूसरे को केवल साबुत फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाने को कहा गया, जबकि तीसरे समूह को इसके साथ रोजाना एक गिलास जूस या स्मूदी भी दी गई। सभी को हर हफ्ते £10 और शिक्षण सामग्री दी गई।
शोध में एंग्जायटी और डिप्रेशन के प्रमाणित प्रश्नावली का इस्तेमाल करके मूड का मूल्यांकन किया गया। जूस लेने वाले समूह में डिप्रेशन के लक्षण बेहतर पाए गए।
निष्कर्ष
हालांकि सिर्फ जूस पीना डिप्रेशन को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकता, लेकिन यह छोटे-छोटे बदलाव हमारी जीवनशैली में बड़ा फर्क ला सकते हैं। जूस के सेवन से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, जिससे कामकाज की क्षमता बढ़ेगी और लंबी अवधि में स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से बचाव होगा।


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