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डॉ. अंशुमान कुमार ने बताया पैकेज्ड फूड के तीन तरह के रसोई और सेहत पर असर

डॉ. अंशुमान कुमार ने पैकेज्ड फूड को तीन रसोई में बांटा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से सेहत पर खतरा बढ़ रहा है।

डॉ. अंशुमान कुमार ने बताया पैकेज्ड फूड के तीन तरह के रसोई और सेहत पर असर

कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अंशुमान कुमार ने बताया कि पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड धीरे-धीरे हमारी सेहत के लिए खतरा बन रहा है। वे इसे तीन रसोई—भगवान की, इंसान की और शैतान की—के रूप में समझाते हैं और कहते हैं कि हम तेजी से तीसरी रसोई के जाल में फंस रहे हैं।

मुख्य बातें

  • पैकेज्ड फूड में हाई फैट, शुगर और नमक (HSS) का ज्यादा इस्तेमाल होता है।
  • ब्राजील के NOVA क्लासिफिकेशन के अनुसार खाद्य पदार्थ चार श्रेणियों में आते हैं।
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बच्चों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हाइपरएक्टिविटी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
  • डॉ. कुमार सलाह देते हैं कि खाने में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें और पैकेज्ड फूड कम खाएं।

NOVA क्लासिफिकेशन से समझें पैकेज्ड फूड की श्रेणियां

ब्राजील में विकसित NOVA क्लासिफिकेशन के अनुसार खाने को चार भागों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में प्राकृतिक खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, अनाज और दूध आते हैं। दूसरी में खाना बनाने वाले तत्व जैसे तेल, नमक और चीनी शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में प्रोसेस्ड फूड आते हैं, जैसे पारंपरिक तरीके से बने पनीर। चौथी श्रेणी में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड आते हैं, जिनमें कई तरह के औद्योगिक तत्व, रंग, फ्लेवर और स्वीटनर मिलाए जाते हैं।

डॉ. अंशुमान कुमार का फूड इंडस्ट्री पर观点

डॉ. कुमार बताते हैं कि फूड इंडस्ट्री ऐसे उत्पाद बनाती है जो लंबे समय तक खराब न हों और बार-बार खरीदे जाएं। इसके लिए खाने के नेचुरल स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाता है, जिससे फाइबर कम हो जाता है। फाइबर की कमी से आंतों के अच्छे बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं, जो पाचन और शरीर की कई प्रक्रियाओं में मदद करते हैं।

वे कहते हैं, "फूड इंडस्ट्री खाने की शेल्फ लाइफ बढ़ा रही है, लेकिन जो इसे खा रहा है उसकी लाइफ कम हो सकती है।"

फैट, शुगर और नमक का स्वास्थ्य पर प्रभाव

डॉ. कुमार ने बताया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में ओमेगा-6 फैटी एसिड, नमक और अतिरिक्त चीनी अधिक होती है। ज्यादा नमक हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ाता है, जबकि ज्यादा फैट और चीनी मोटापा और फैटी लिवर जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। ओमेगा-6 एसिड शरीर में सूजन और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है।

तीन रसोई: भगवान, इंसान और शैतान की रसोई

डॉ. कुमार के अनुसार, भगवान की रसोई में प्राकृतिक भोजन जैसे फल, सब्जियां, दालें और अनाज होते हैं जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इंसान की रसोई में घर का ताजा भोजन जैसे दाल, रोटी और सब्जियां शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं। शैतान की रसोई में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड आता है, जिसमें स्वाद, रंग और लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीकें शामिल होती हैं। यह ज्यादा फैट, नमक और शुगर के कारण हानिकारक होता है।

बच्चों की सेहत पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का असर

डॉ. कुमार ने चेतावनी दी कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ज्यादा कैलोरी, फैट और शुगर के कारण बच्चों में मोटापा बढ़ा रहा है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा होता है। साथ ही फोकस कम होना और हाइपरएक्टिविटी जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

स्वस्थ खाने के लिए सुझाव

डॉ. अंशुमान कुमार ने कहा कि भोजन चुनते समय पैकेट के आकर्षक विज्ञापनों पर ध्यान न दें, बल्कि उसके सामग्री सूची को देखें। रोजाना फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज खाने की आदत डालें। पैकेज्ड स्नैक्स, शुगरी ड्रिंक और इंस्टेंट फूड का सेवन सीमित करें।

रात के वक्त भूख लगने पर ऐप से खाना मंगवाना आसान है, लेकिन घर में फल या भुना चना जैसे हेल्दी विकल्प रखना बेहतर होगा। आखिरकार सवाल यही है कि आपकी थाली में भगवान की रसोई का खाना है, इंसान की रसोई का भोजन या शैतान की रसोई का पैकेट।

स्रोत: tv9hindi.com

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