श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर पार्क में पीडीपी के स्थापना दिवस समारोह में महबूबा मुफती ने कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कश्मीरी युवाओं को परेशान किया जा रहा है, कश्मीरी अधिकारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है और आदिवासी समुदायों को उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है।
कश्मीर में शक की निगाह और युवाओं पर दबाव
महबूबा ने पूछा कि हिंदुस्तान को कश्मीरियों पर इतना शक क्यों है। उन्होंने कहा, "हमारे युवाओं को पीटा जा रहा है, कश्मीरी अधिकारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है और आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है। इस पर सोचने की जरूरत है।"
नेकां के खिलाफ गंभीर आरोप
नेकां की आलोचना करते हुए महबूबा ने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म की जगह मुख्यमंत्री की व्यवस्था अपनाने के बाद इस पार्टी ने कश्मीर की स्वायत्तता की मांग को दफना दिया है। उन्होंने नेकां नेतृत्व को कश्मीर में आतंकवाद के कठिन दौर का जिम्मेदार बताया और कहा कि इस दौरान पार्टी ने 'इख्वान' बलों का इस्तेमाल किया।
पाकिस्तान और कश्मीरियों का रुख
महबूबा ने नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की पाकिस्तान पर टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरियों ने अपना फैसला पहले ही ले लिया है और वे भारत के साथ खड़े हैं।
शेख अब्दुल्ला की भूमिका और पीडीपी की स्थापना
उन्होंने जम्मू कश्मीर के विलय में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की भूमिका याद करते हुए बताया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होते हुए भी उन्होंने भारत पर भरोसा जताया था। महबूबा ने शेख अब्दुल्ला के जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ संबंधों का भी उल्लेख किया, साथ ही 'मुगल रोड' के निर्माण का जिक्र किया।
पीडीपी का उद्देश्य और सरकार से बातचीत की अपील
महबूबा ने कहा कि पीडीपी की स्थापना जम्मू कश्मीर की गरिमा और पहचान को बहाल करने के लिए हुई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ने कभी कोई "दोहरा एजेंडा" नहीं अपनाया। उन्होंने भारत सरकार से जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ बातचीत शुरू करने का आग्रह किया और सवाल उठाया कि कब तक इस क्षेत्र पर ताकत के दम पर शासन होगा।
मुख्य तथ्य
- महबूबा ने कश्मीर में युवाओं, अधिकारियों और आदिवासियों के साथ हो रही परेशानियों का जिक्र किया।
- उनका कहना है कि नेकां ने कश्मीर की स्वायत्तता की मांग को दबा दिया।
- महबूबा ने पाकिस्तान पर फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर कश्मीरियों के भारत के साथ खड़े होने को बताया।
- पीडीपी की स्थापना जम्मू कश्मीर की पहचान बहाल करने के लिए की गई थी।
- उन्होंने भारत सरकार से क्षेत्रीय बातचीत शुरू करने की अपील की।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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