भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जो धूम्रपान करने वाले और न करने वाले दोनों को प्रभावित कर रहा है। धूम्रपान, जैसे सिगरेट और बीड़ी पीना, इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, प्रदूषण, रसोई के धुएं, हानिकारक पदार्थों का संपर्क और पारिवारिक इतिहास भी जोखिम बढ़ाते हैं। नवंबर को लंग कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है ताकि इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
डॉक्टर अमीश वोरा ने एक्स-रे की सीमाएं बताई
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर अमीश वोरा के अनुसार, सामान्य चेस्ट एक्स-रे से फेफड़ों में कैंसर की पुष्टि करना संभव नहीं है। ट्यूमर का आकार छोटा होने या उसकी स्थिति के कारण यह एक्स-रे में दिखाई नहीं देता, इसलिए इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। कैंसर की आशंका होने पर डॉक्टर अन्य जांच कराना सलाह देते हैं।
फेफड़ों के कैंसर की जांच के मुख्य तरीके
फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने के लिए तीन मुख्य जांचें उपयोग की जाती हैं:
- चेस्ट एक्स-रे: फेफड़ों में असामान्य बदलाव या गांठ का पता लगाने में मदद करता है।
- सीटी स्कैन: फेफड़ों की अधिक स्पष्ट और विस्तृत तस्वीरें देता है, जिससे छोटी गांठें भी दिखाई देती हैं।
- बायोप्सी और ब्रोंकोस्कोपी: बायोप्सी में फेफड़ों के संदिग्ध हिस्से से ऊतक का नमूना लेकर कैंसर की पुष्टि की जाती है। ब्रोंकोस्कोपी में पतली कैमरे वाली नली से सांस की नलियों की जांच की जाती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
लंबे समय तक खांसी बने रहना, खांसी में खून आना, बिना वजह वजन कम होना या सीने में लगातार दर्द रहने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जोखिम वाले लोगों को नियमित स्क्रीनिंग और जांच करानी चाहिए।
लंग कैंसर से बचाव के उपाय
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह बचना चाहिए। दूसरों के धुएं से दूर रहना और घर-कार्यस्थल पर हानिकारक पदार्थों से बचाव के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। नियमित योग और व्यायाम, संतुलित आहार, प्रदूषण वाले इलाकों में मास्क पहनना और स्वच्छ वातावरण में समय बिताना भी जरूरी है।
मनीष रायसवाल, जो टीवी9 डिजिटल में लाइफस्टाइल बीट के टीम लीड हैं, ने इस विषय पर जानकारी साझा की है। उनका पत्रकारिता में अनुभव 2015 से शुरू हुआ और उन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है।
स्रोत: tv9hindi.com


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