संक्षेप: ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। उनके विरोधी फ्लेवियो बोल्सोनारो ने भी चुनाव परिणामों को चुनौती दी है।
ट्रंप ने चुनाव परिणाम पर जताई आपत्ति
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्राजील के हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों से आहत हैं। उन्होंने लूला दा सिल्वा की जीत को धांधली का परिणाम बताया है। मिसीसिपी में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "चुनाव ऐसे होने चाहिए जिनके नतीजों पर कोई सवाल न उठे, लेकिन मुझे इन चुनावों में गड़बड़ी लगती है। जिस तरीके से मतगणना हुई, उससे सवाल खड़े होते हैं। साफ शब्दों में कहूं तो यह एक और धांधली वाला चुनाव लगता है।"
फ्लेवियो बोल्सोनारो ने चुनाव परिणामों को चुनौती दी
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में लूला दा सिल्वा की जीत पर उनके प्रतिद्वंद्वी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो ने चुनाव के नतीजों को चुनौती दी है। यह घटना देश की दो राजनीतिक धाराओं के बीच तीखे टकराव की आशंका को बढ़ा रही है। पहले राउंड में पिछड़ने के बाद लूला ने मतगणना के दूसरे राउंड में बढ़त हासिल की और चुनाव जीत लिया।
मतदान समय बढ़ाने से हुई अव्यवस्था
फ्लेवियो बोल्सोनारो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मतदाताओं के अनुरोध पर मतदान का समय बढ़ाए जाने से जो अव्यवस्था हुई है, उसे देखते हुए वे चुनाव रद्द करने की मांग अदालत में करेंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनके पास इस मांग के लिए कौन से कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।
लूला और ट्रंप के बीच राजनीतिक मतभेद
लूला दा सिल्वा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। ब्राजील के निर्वाचन न्यायालय ने 100 प्रतिशत मतगणना के बाद घोषणा की कि लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी बोल्सोनारो पर करीब 44 लाख वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल की है। उन्हें कुल मतों का 51.8 प्रतिशत मिला।
लूला की चौथी बार राष्ट्रपति बनने की जीत
ब्राजील में वामपंथी नेता लूला दा सिल्वा 80 वर्ष की उम्र में चौथी बार देश के राष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने इस चुनाव में फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराया है। इस जीत के साथ लूला राष्ट्रपति पद पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेताओं में दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे, उनसे आगे केवल गेटुलियो वर्गास हैं। लूला की यह जीत ऐसे समय हुई है जब चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, अपराध और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दे रहे।


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