नोएडा में फोर्टिस के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजी डॉ. अनुपम बिस्वास ने वॉक करने और ब्लड शुगर नियंत्रण के बीच संबंध पर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वॉक करना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार होता है और सही समय पर वॉक करने से इसके फायदे और अधिक बढ़ जाते हैं।
वॉक से ब्लड शुगर नियंत्रण कैसे होता है?
डॉ. अनुपम के अनुसार, वॉक करने से मांसपेशियों को ऊर्जा की जरूरत होती है, जो खून में मौजूद ग्लूकोज से पूरी होती है। इससे ब्लड शुगर का स्तर कम होता है। नियमित वॉक से शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ती है, जिससे इंसुलिन बेहतर तरीके से काम करता है और ग्लूकोज कोशिकाओं तक पहुंचता है।
वॉक करने का सबसे उपयुक्त समय
डॉक्टर ने बताया कि खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की या मध्यम गति से वॉक करना सबसे फायदेमंद होता है। खासकर लंच या डिनर के बाद वॉक करने से भोजन के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। डिनर के बाद टहलना उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो दिनभर ज्यादा बैठे रहते हैं।
हालांकि सुबह की वॉक भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह हार्ट हेल्थ, वजन नियंत्रण और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती है।
वॉक की दिनचर्या और सावधानियां
डॉ. अनुपम ने सलाह दी कि एक बार में लंबे समय तक चलने के बजाय दिनभर हल्की-फुल्की गतिविधियां बनाए रखें। शुरुआत 10 से 15 मिनट की वॉक से करें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम गति की शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखें।
डायबिटीज के मरीजों को वॉक करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जो इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे ब्लड शुगर अचानक कम हो सकता है। उन्हें हाइपोग्लाइसीमिया के जोखिम पर ध्यान देना जरूरी है।
डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि वॉक दवाओं या संतुलित आहार का विकल्प नहीं है, बल्कि ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करने वाली एक स्वस्थ आदत है।
मुख्य बातें
- वॉक करने से ब्लड शुगर लेवल कम होता है और इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है।
- खाने के बाद 10-15 मिनट की वॉक ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए फायदेमंद है।
- सुबह की वॉक भी स्वास्थ्य और इंसुलिन सेंसिटिविटी के लिए लाभकारी है।
- डायबिटीज मरीजों को वॉक करते समय हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा ध्यान में रखना चाहिए।
स्रोत: indiatv.in


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