उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। आगरा शिक्षक क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की, जबकि लखनऊ से भाजपा के उमेश द्विवेदी विजयी रहे। चुनाव में मतगणना के दौरान हिंसा और बूथ कैप्चरिंग के आरोप भी लगे हैं।
आगरा शिक्षक क्षेत्र में हिंसा और बूथ कैप्चरिंग के आरोप
आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आकाश अग्रवाल ने मतगणना के दौरान बूथ कैप्चरिंग और शिक्षकों को धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके समर्थक शिक्षकों को परेशान किया गया और उन्हें डराया-धमकाया गया। अग्रवाल ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस चुनाव ने उनकी सरकार के प्रति धारणा बदल दी है। उन्होंने कहा, "शिक्षकों के MLC चुनाव का स्वरूप ही बदल गया है, मुझे लगता है कि शिक्षक अब कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे।"
BJP प्रत्याशी पर मारपीट के आरोप
समाजवादी छात्र सभा आगरा के अध्यक्ष अमित प्रताप यादव ने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान भाजपा उम्मीदवार हरि किशोर तिवारी और उनके समर्थकों ने मारपीट की। यादव ने बताया कि रात करीब 2.30 बजे जब मतगणना का दूसरा दौर शुरू होने वाला था, तब भाजपा उम्मीदवार ने अचानक हमला किया। उन्होंने कहा कि उस समय उनके उम्मीदवार 2,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे।
क्या हुआ मतगणना के दौरान?
अमित प्रताप यादव ने बताया कि उनके टेबल के पास 15 से 25 ऐसे लोग थे जिनके पास आधिकारिक पोलिंग एजेंट होने का कोई प्रमाण नहीं था। इन लोगों को पुलिस लेकर आई थी। जब भाजपा प्रत्याशी ने हमला किया तो अफरा-तफरी मच गई और हाथापाई शुरू हो गई। यादव ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग और प्रशासन उस समय कहां थे।
कौन-कौन जीते विधान परिषद की सीटें?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 11 सीटों के चुनाव में भाजपा ने 6 सीटें जीती हैं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें हासिल की हैं। मेरठ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के दिनेश कुमार गोयल निर्वाचित हुए हैं। शिक्षक क्षेत्र की बात करें तो लखनऊ से भाजपा के उमेश द्विवेदी, वाराणसी से समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव, आगरा से समाजवादी पार्टी के आकाश अग्रवाल, मेरठ से भाजपा के चंद शर्मा और बरेली-मुरादाबाद से भाजपा के हरि सिंह ढिल्लों ने जीत दर्ज की है।
क्या इस चुनाव का परिणाम राज्य की राजनीति पर असर डालेगा?
यह चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले एक राजनीतिक सेमी-फाइनल माना जा रहा है, जिसमें भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखी गई। दोनों दलों ने महत्वपूर्ण सीटें जीतीं, जो आगामी विधानसभा चुनाव के रूझान को समझने में मदद करती हैं।
स्रोत: livetimes.news


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