कांग्रेस की मुख्य बातें
- रविंदर शर्मा ने 1 नवंबर के रामलीला मैदान कार्यक्रम से पहले बयान दिया।
- कांग्रेस की लड़ाई व्यापारियों के खिलाफ नहीं, वोट के अधिकार के लिए है।
- भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
- मतदाता सूचियों से 13 करोड़ नाम हटाए जाने की शिकायत जताई।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट विस्तार को लेकर असंतोष पर भी प्रतिक्रिया दी।
व्यापारियों और कांग्रेस की योजना
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस का 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाला कार्यक्रम व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने पहले दशहरे तक अपना कार्यक्रम टाल दिया था और फिर रैली की अनुमति मिलने के बाद इसे आयोजित करने का फैसला किया। उनका कहना था कि यह प्रदर्शन सड़कों पर नहीं होगा जिससे कारोबार प्रभावित हो, बल्कि पूरी रैली मैदान के अंदर ही होगी।
शर्मा ने पूछा कि भाजपा की यात्रा या पदयात्रा निकलने पर व्यापारियों को नुकसान की आशंका क्यों नहीं जताई जाती, जबकि कांग्रेस के कार्यक्रम पर यह चिंता क्यों है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांग उठाने के लिए विपक्ष को रास्ता तलाशना उसका अधिकार है।
मतदान अधिकार और चुनाव आयोग विवाद
रविंदर शर्मा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में लाए गए महाभियोग प्रस्ताव की चर्चा न होने का आरोप भाजपा पर लगाया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है जो अभी लंबित है। शर्मा ने लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने की शिकायत की और कहा कि इससे वोट डालने में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने एक शिकायत का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 13 हजार मतदाताओं के नामों में गड़बड़ी हुई है।
उन्होंने जोर दिया कि किसी भी नागरिक का वोट किसी भी पार्टी को जाना उसका अधिकार है, लेकिन उसका नाम मतदाता सूची से हटाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने व्यापारियों और अन्य वर्गों से कांग्रेस के अभियान का समर्थन करने की अपील की।
राष्ट्रीय सुरक्षा और जम्मू-कश्मीर की राजनीति
भारतीय सेना को निशाना बनाए जाने वाले कथित एआई-जनित वीडियो पर शर्मा ने कहा कि सरकार को ऐसी फर्जी सामग्री का तुरंत खंडन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए असली और नकली वीडियो पहचानना मुश्किल होता है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सही जानकारी दे।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीन की गतिविधियों और गलवान घाटी में सैनिकों की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा पर सरकार का ध्यान जरूरी है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट विस्तार को लेकर असंतोष पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने भाजपा पर जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार को कमजोर करने और राज्य का दर्जा बहाल न करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव कराए लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा नहीं किया। कांग्रेस ने कैबिनेट में शामिल होने से इनकार किया ताकि भाजपा की सच्चाई सामने आ सके।
शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों को प्राथमिकता दी और भाजपा चाहती है कि मंत्रियों की संख्या कम रहे जिससे सरकार में असंतोष बढ़े। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस दोनों जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य बनने की मांग कर रहे हैं।
यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है
यह बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति, मतदाता अधिकारों और कांग्रेस के आगामी कार्यक्रम के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। रविंदर शर्मा के आरोप और कांग्रेस के रुख से यह साफ होता है कि आगामी चुनाव और राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।
स्रोत: deshbandhu.co.in


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।