मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद फिर से तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने निर्वाचन आयोग के सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर सवाल उठाते हुए अदालत से सभी प्रशासनिक रिकॉर्ड तलब करने की मांग की है। मसूद ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बावजूद यदि फैसला नियमों के खिलाफ है, तो वह गलत ही रहेगा।
इमरान मसूद ने फार्म-6 के नियमों पर सवाल उठाए
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि मतदाता पंजीकरण के नियमों के उल्लंघन और वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका से संबंधित है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मामले से जुड़े सभी प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच होनी चाहिए। मसूद के अनुसार, विवाद का मूल प्रश्न यह है कि क्या एसआईआर की प्रक्रिया में कानूनी नियमों का पालन हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि तीनों चुनाव आयुक्त किसी फैसले पर सहमत भी हों, लेकिन वह नियमों के अनुरूप नहीं है तो केवल सर्वसम्मति से उसे सही नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि मुख्य मुद्दा मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और किसी पात्र नागरिक का नाम मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटाए जाने से रोकना है।
चुनाव आयोग का हलफनामे में पक्ष
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सभी तीन चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज किया। उप चुनाव आयुक्त प्रकाश येतुरु के हलफनामे में कहा गया कि 24 जून, 27 अक्टूबर और 14 मई को जारी आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। आयोग ने यह भी बताया कि अदालत में दाखिल हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त सहित सभी चुनाव आयुक्तों ने स्वीकृति दी है। आयोग का कहना है कि निर्णय की प्रक्रिया संस्थागत और सामूहिक थी, जिससे मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर उठाए गए सवालों का जवाब दिया गया है।
फार्म-6 और घोषणा-पत्र को लेकर विवाद जारी
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फार्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, एसआईआर के दौरान लिए जाने वाला घोषणा-पत्र फार्म-6 से अलग दस्तावेज है, जो विवाद का एक बड़ा कारण बना है। विपक्ष फार्म-6 से जुड़े नियमों और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। वहीं आयोग ने कहा कि निर्धारित फार्म में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित दस्तावेज किस उद्देश्य से उपयोग किए गए और एसआईआर की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुसार हुई या नहीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी नेताओं की इसी तरह की याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसे अदालत ने एक साथ सुनवाई के लिए जोड़ा है।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर नजर
एसआईआर को लेकर विवाद में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के मताधिकार और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया मुख्य मुद्दे बन गए हैं। विपक्ष अनियमितताओं की जांच और प्रशासनिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने पर जोर दे रहा है, जबकि आयोग अपने फैसलों को नियमों के अनुरूप और सर्वसम्मति से लिया गया बताता है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि कानूनी सवालों पर आगे क्या दिशा तय होती है और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर अदालत क्या रुख अपनाती है।


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