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सोमवार, 26 अक्टूबर 2026
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टॉयलेट से जुड़ी समस्या पाइल्स नहीं, हो सकता है कोलन कैंसर

टॉयलेट से जुड़ी समस्याएं पाइल्स नहीं, कोलन कैंसर के भी संकेत हो सकते हैं, इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

टॉयलेट से जुड़ी समस्या पाइल्स नहीं, हो सकता है कोलन कैंसर

टॉयलेट से जुड़ी कई परेशानियों को अक्सर लोग पाइल्स या बवासीर समझ लेते हैं, लेकिन यह गलत हो सकता है। ब्लड आना, कब्ज होना या मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण को केवल पाइल्स से जोड़ना सही नहीं है। ये लक्षण कोलोरेक्टल कैंसर यानी बड़ी आंत के कैंसर के भी हो सकते हैं। इसलिए इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर्स का क्या कहना है?

दिल्ली के डॉ लाल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. ब्रह्मानंद लाल बताते हैं कि पाइल्स कैंसर नहीं बनता, लेकिन इसे हल्के में लेना भी गलत होगा। पाइल्स के लक्षणों में ब्लड आना, पेट में दर्द और कब्ज शामिल हैं, जो कोलोरेक्टल कैंसर के भी लक्षण हो सकते हैं। अगर ब्लीडिंग को पाइल्स समझकर नजरअंदाज किया जाए तो बाद में यह कैंसर साबित हो सकता है, जो जानलेवा भी हो सकता है। इसलिए किसी भी ब्लीडिंग पर केवल विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।

कोलन कैंसर के बढ़ते मामले

कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत और मलाशय का कैंसर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। 2022 में दुनिया में इसके लगभग 19 लाख नए मामले और 9 लाख से अधिक मौतें हुईं। यह तीसरा सबसे आम कैंसर और मौतों का दूसरा प्रमुख कारण है। इसके लक्षणों में मल में खून आना, मल त्याग की आदत में बदलाव, कब्ज या दस्त, लगातार पेट दर्द, बिना वजह वजन कम होना, थकान और खून की कमी शामिल हैं।

यदि खून आ रहा हो या मल त्याग की आदत में बदलाव हो तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी से कारण पता लगाया जा सकता है।

कोलोरेक्टल कैंसर क्या है?

यह कैंसर बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय (रेक्टम) की अंदरूनी परत से शुरू होता है। कई बार इसकी शुरुआत पॉलीप्स से होती है, जो सामान्यत: कैंसर नहीं बनते, लेकिन कुछ प्रकार के पॉलीप एडेनोमा कैंसर में बदल सकते हैं। स्क्रीनिंग के दौरान कुछ पूर्व-कैंसर पॉलीप को पहचानकर हटा भी दिया जाता है।

कैसे बचाव करें?

  1. गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल कोलन कैंसर और पाइल्स की मुख्य वजह हो सकते हैं। लगातार तला-भुना खाना आंतों को नुकसान पहुंचाता है और बीमारी को बढ़ावा देता है।
  2. फाइबर युक्त सब्जियां और फल अधिक से अधिक खाएं।
  3. दिन में कम से कम 2.5 लीटर पानी पिएं और पानी वाले सीजनल फल खाएं।
  4. रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर करें और खुद को सक्रिय रखें।
  5. हर 6 महीने में हेल्थ चेकअप कराएं ताकि बीमारी को जल्दी पकड़ा जा सके और समय पर इलाज हो सके।
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