तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने बुधवार को बताया कि राज्य में सूखे की स्थिति पर रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।
मुख्य तथ्य
- तेलंगाना सरकार ने सूखे की रिपोर्ट केंद्र को सौंपी।
- अल नीनो के कारण वर्षा में कमी से निपटने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
- सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने सुझाव दिए।
- सरकार ने जल संसाधन प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति को लेकर योजनाएं बनाई हैं।
- भविष्य के संकट से बचाव के लिए समन्वित कार्य योजना तैयार की जाएगी।
तेलंगाना में सूखे से निपटने की तैयारियां
मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव से वर्षा में कमी और सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए और किसानों की सहायता, पेयजल और सिंचाई की समस्याओं के समाधान पर सुझाव दिए।
बैठक में उप-समिति के सदस्य, राज्य मंत्री, मुख्य सचिव संजय जाजू और नोडल अधिकारी रामकृष्ण राव भी मौजूद थे। कांग्रेस, बीआरएस, भाजपा, एआईएमआईएम, सीपीआई और सीपीएम समेत कई दलों के नेता बैठक में शामिल हुए।
सरकार की रणनीति और राजनीतिक सहयोग
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सभी राजनीतिक दलों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक समन्वित योजना बनाएगी। उन्होंने सभी पक्षों से राजनीतिक मतभेदों को अलग रखते हुए जनहित में सरकार का सहयोग करने की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से परामर्श कर चुकी है और अल नीनो के प्रभाव पर कई बैठकें आयोजित की गई हैं।
साथ ही, एक समिति भी गठित की गई है जो इस मुद्दे का अध्ययन कर रही है और जन जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
जल संसाधनों का प्रबंधन और भविष्य की तैयारी
भट्टी विक्रमार्क ने बताया कि यदि वर्षा की कमी केवल तेलंगाना तक सीमित होती तो पड़ोसी राज्यों से जलाशयों में पानी आने की उम्मीद होती। लेकिन देश के अन्य हिस्सों में भी वर्षा कम होने से यह संभावना कम हो गई है। इसलिए कुशल जल संसाधन प्रबंधन की जरूरत बढ़ गई है।
सरकार जलाशयों में जल भंडारण का ध्यान रखते हुए संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने की योजना बना रही है। सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है।
इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की कमी नहीं होने और पशुओं के लिए जल तथा चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी अग्रिम तैयारी की जा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार वैज्ञानिक सलाह के आधार पर निर्णय लेगी और सभी दलों के सुझावों की जांच कर उचित कदम उठाएगी।
स्रोत: deshbandhu.co.in


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