उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति के तौर पर अटैच किया है। यह कार्रवाई 26 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई। ED ने यूनिवर्सिटी की बाजार कीमत लगभग 1170 करोड़ रुपये बताई है।
ED की जांच और FIR
ED ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर यह जांच शुरू की थी। आरोप है कि किसानों की जमीन जबरन कब्जे में लेकर यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल किया गया। जिला प्रशासन की जांच में सिंहनखेड़ा गांव की 34 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे का भी पता चला। हालांकि, बाद में गृह मंत्रालय के अभिरक्षक ने उस जमीन का कब्जा वापस ले लिया।
सरकारी ठेकों और धन के दुरुपयोग के आरोप
जांच में सामने आया कि सरकारी ठेकों से मिले पैसों और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एक कंपनी ने लोक निर्माण विभाग से 186 करोड़ रुपये के ठेके लिए थे, जिनमें से 30-40 प्रतिशत राशि यूनिवर्सिटी के काम में लगाई गई। एक अन्य फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा भी दिया। ED का कहना है कि सरकारी धन का गलत इस्तेमाल हुआ है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
सरकारी पैसे से बने भवनों का विवाद
ED की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय विधायक और विधान परिषद सदस्य के क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये यूनिवर्सिटी परिसर में खर्च हुए। उस समय आजम खान उत्तर प्रदेश जल निगम के अध्यक्ष थे। इसके अलावा, राज्य सरकार ने पंडाल, छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के लिए 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
2015 में पंडाल के मालिकाना हक को संस्कृति विभाग के पास रखने की शर्त थी, पर 2016 में आदेश बदलकर इसे यूनिवर्सिटी को दे दिया गया। इससे सरकारी धन से बने सार्वजनिक निर्माण को निजी संपत्ति में बदलने का मामला सामने आया।
संपत्ति का मूल्यांकन और खर्च का हिसाब
जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी के 59 भवनों का निर्माण 494.46 करोड़ रुपये में हुआ। जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये आंकी गई, कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये है। हालांकि, ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में सिर्फ 78.32 करोड़ रुपये खर्च दिखाए, जिनमें से 12.29 करोड़ रुपये का चंदा गैर-वास्तविक माना गया। ED का दावा है कि 426.46 करोड़ रुपये का स्रोत संतोषजनक नहीं पाया गया, इसलिए संपत्ति अटैच की गई।
राजनीतिक चंदे और आयकर विभाग की कार्रवाई
जांच में यह भी पता चला कि मेरठ की दो संस्थाओं ने ट्रस्ट को 6.24 करोड़ रुपये का चंदा दिया था, जिसे राजनीतिक प्रभाव से जोड़ा गया। आयकर विभाग ने भी ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है।
घरों पर बुलडोजर और अन्य आरोप
ED ने रामपुर पुलिस की तरफ से दर्ज 28 अन्य FIR को भी जांच में शामिल किया है। आरोप हैं कि 2016 में रामपुर में कई परिवारों के घर बुलडोजर से गिराए गए और इन लोगों के साथ मारपीट, धमकी, लूटपाट हुई। टूटे मकानों का मलबा यूनिवर्सिटी परिसर में ले जाने और सफाई मशीनों को यूनिवर्सिटी भेजने के आरोप भी जांच के तहत हैं।
नई FIR और जांच की स्थिति
ED ने पुलिस के साथ जानकारी साझा कर 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में आजम खान, ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज कराई। इससे पहले 19 अगस्त 2026 को यूनिवर्सिटी परिसर पर ED ने छापेमारी भी की थी। जांच अभी जारी है और आरोपों की जांच न्यायालय में होनी बाकी है।
स्रोत: indiatv.in


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।