सर्बिया में छात्रों के समर्थन वाले आंदोलन ने लंबे समय से सत्ता में रहे नेता अलेक्जेंडर वुसिक को चुनाव में हराकर एक बड़ा राजनीतिक बदलाव कर दिया है। इस जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है, लेकिन अब यह सवाल उठा है कि सरकार कैसे चलेगी और प्रधानमंत्री कौन होगा।
चुनाव में छात्रों के समर्थन वाले गुट की जीत
सर्बिया के राज्य चुनाव आयोग के अनुसार लगभग 99 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। छात्रों के समर्थन वाले उम्मीदवारों को कुल 52.7 प्रतिशत वोट मिले जबकि वुसिक की सर्बिया प्रोग्रेसिव पार्टी गठबंधन को 39.2 प्रतिशत वोट मिले।
250 सीटों वाली संसद में छात्रों के समर्थन वाले गुट को 139 सीटें मिली हैं, वहीं वुसिक के गठबंधन को 97 सीटें मिली हैं। बाकी सीटें छोटे दलों के पास गई हैं। विश्वविद्यालय प्रशासक मारिजियाना राडोवानोविच पाजोविच ने इस जीत पर हैरानी जताई और कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है क्योंकि यह संघर्ष काफी लंबा चला और वुसिक ने प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाए रखा।
रेलवे स्टेशन हादसे के बाद शुरू हुए विरोध
अलेक्जेंडर वुसिक 2014 से सर्बिया के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के रूप में प्रभावशाली रहे। नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने देश में भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू कर दिए। छात्रों ने इन प्रदर्शनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धीरे-धीरे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, किसान, कलाकार और समाज के अन्य वर्ग भी आंदोलन के साथ जुड़ गए। आंदोलनकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और सरकारी जवाबदेही की मांग की।
आखिरकार, छात्रों के समर्थन वाले उम्मीदवारों ने चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की और वुसिक की पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया। करीब 60 लाख की आबादी वाले सर्बिया में यह परिणाम बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है और यूरोप में युवाओं द्वारा बेहतर शिक्षा, जवाबदेह सरकार और बेहतर भविष्य की मांगों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
अब सर्बिया का अगला नेता कौन होगा?
चुनाव जीतने के बाद आंदोलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार चलाने की है क्योंकि इस आंदोलन का कोई एक स्पष्ट नेता नहीं है। इस कारण प्रधानमंत्री पद और अन्य अहम पदों पर किसे जिम्मेदारी दी जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। आंदोलन का मुख्य एजेंडा भ्रष्टाचार खत्म करना और शिक्षा सुधार है।
छात्रों के उम्मीदवारों में कार्डियोलॉजिस्ट इलिया सर्डानोविच, पूर्व सेंट्रल बैंक गवर्नर देजान सोस्किक और बेलग्रेड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रादोमिर साजिक शामिल हैं। जीत के बाद साजिक ने आंदोलन की ओर से अपनी बात रखी। 60 वर्षीय इंश्योरेंस कर्मचारी स्वेतलाना कारागकोजिडो ने कहा कि भ्रष्टाचार जीवन के हर हिस्से में घुस गया है और अब देश एक सामान्य समाज की ओर बढ़ेगा।
बदलाव को लेकर मतभेद भी हैं
सभी लोग इस बदलाव को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। 60 वर्षीय सरकारी कर्मचारी सेनका रादाकोविच ने कहा कि देश में अचानक और पूरी तरह से बदलाव होना उन्हें पसंद नहीं है। उन्होंने आंदोलन के पीछे छिपे लोगों और भविष्य की सरकार को लेकर सवाल उठाए।
चुनाव जीत के बाद आंदोलन की असली परीक्षा शुरू होगी कि वह भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए, शिक्षा व्यवस्था में सुधार करे और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखे।


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