डिलीवरी के बाद वजन बढ़ने के कारण
फरीदाबाद की फोर्टि के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की निदेशक डॉ. नीति कौतिश के अनुसार, प्रेग्नेंसी के बाद महिलाओं का वजन बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। यह शरीर में होने वाले प्राकृतिक हार्मोनल बदलाव और जीवनशैली में आए बदलावों के कारण होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर बच्चे के विकास और स्तनपान के लिए अतिरिक्त फैट जमा करता है, जो डिलीवरी के बाद तुरंत कम नहीं होता।
हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बदलाव भूख, मेटाबॉलिज्म और शरीर में फैट जमा होने के तरीके को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, कुछ महिलाओं में डिलीवरी के बाद थायरॉइड ग्रंथि की सूजन (पोस्टपार्टम थायरॉइडाइटिस) की समस्या भी हो सकती है, जिससे वजन बढ़ सकता है।
डिलीवरी के बाद जीवनशैली में बदलाव
डिलीवरी के बाद महिला की दिनचर्या में काफी बदलाव आता है। नवजात शिशु की देखभाल के कारण अक्सर पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती, जिससे भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं। इससे बार-बार भूख लगती है और खाने की इच्छा बढ़ जाती है। मानसिक तनाव और प्रसव के बाद भावनात्मक बदलाव भी खाने की आदतों को प्रभावित करते हैं।
स्तनपान कराने से शरीर की ऊर्जा की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन हर महिला का वजन स्तनपान के दौरान कम होना जरूरी नहीं है। कुछ महिलाओं का वजन कम होता है, जबकि कुछ का पहले जैसा बना रहता है।
डॉक्टर की सलाह और सावधानियां
डिलीवरी के बाद वजन कम करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। डॉ. नीति कौतिश के अनुसार, क्रैश डाइट या अत्यधिक व्यायाम से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि महिलाएं संतुलित आहार लें, पर्याप्त पानी पिएं और डॉक्टर की सलाह के बाद धीरे-धीरे शारीरिक गतिविधियां शुरू करें।
अगर डिलीवरी के बाद वजन लगातार बढ़ रहा है या थकान जैसे अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श करना आवश्यक है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर अतिरिक्त फैट जमा करता है जो डिलीवरी के बाद तुरंत कम नहीं होता।
- हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी और तनाव वजन बढ़ने के मुख्य कारण हैं।
- स्तनपान से वजन कम होना हर महिला में समान नहीं होता।
- डिलीवरी के बाद संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह से ही वजन कम करना चाहिए।
स्रोत: indiatv.in


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