नेपाल के कर्णाली हाईवे पर अब तक 917 लोगों की मौत हो चुकी है, जो सुर्खेत से जुमला तक 232 किलोमीटर लंबा है। यह हाईवे खतरनाक मोड़, संकरी सड़कें और खराब हालत की वजह से बेहद जोखिम भरा है।
कर्णाली हाईवे की स्थिति और महत्व
कर्णाली हाईवे दैलेख, कालीकोट और जुमला जैसे दूरदराज के इलाकों को जोड़ता है। स्थानीय लोग इस सड़क पर निर्भर हैं क्योंकि यह अस्पताल, बाजार, स्कूल और दूसरे शहरों से जुड़ने का मुख्य मार्ग है। हालांकि इसकी सड़कें इतनी संकरी हैं कि कई जगह दो वाहन एक साथ नहीं गुजर पाते।
हादसों के कारण और संख्या
कर्णाली प्रांत की पुलिस के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2014-15 से अब तक इस हाईवे पर 917 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले तीन सालों में 111 मौतें हुई हैं और 309 लोग घायल हुए हैं। हादसों के मुख्य कारण हैं खराब सड़क, संकरी सड़कें, खतरनाक मोड़, तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और पुरानी गाड़ियां। खासतौर पर अंधे मोड़ों पर ड्राइवर को सामने आने वाली गाड़ी दिख नहींती, जिससे हादसे होते हैं।
बारिश के मौसम में खतरा बढ़ता है
बारिश के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं। भारी बारिश में पहाड़ों से पत्थर और मिट्टी सड़क पर गिरते रहते हैं, जिससे ट्रैफिक रुक जाता है और यात्री घंटों फंसे रहते हैं। लैंडस्लाइड वाली जगहों पर मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ता है, लेकिन फिर भी पहाड़ों के खिसकने का खतरा बना रहता है। खराब मौसम में यह हाईवे यात्रा के लिए और भी खतरनाक हो जाता है।
मरम्मत और फंड खर्च
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस हाईवे को सुधारने के लिए भारी रकम खर्च की गई है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में वर्ल्ड बैंक की मदद से सुर्खेत-जुमला मार्ग की मरम्मत पर करीब एक अरब नेपाली रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद भी सड़क की हालत में खास सुधार नहीं हुआ। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में मरम्मत पर 670 मिलियन नेपाली रुपये और खर्च किए गए हैं, फिर भी सड़क की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
सड़क सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है?
कर्णाली हाईवे खतरे से भरा होने के बावजूद स्थानीय लोगों के लिए जरूरी मार्ग है, इसलिए इसे बंद नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बढ़ाने के लिए खतरनाक मोड़ों पर सेफ्टी वॉल बनाना, सड़क की अच्छी मरम्मत करना और लैंडस्लाइड वाले इलाकों में वॉर्निंग सिस्टम लगाना जरूरी है।
"917 मौतें यह याद दिलाती हैं कि सड़क सुरक्षा कितनी अहम है।"
मुख्य तथ्य
- कर्णाली हाईवे की लंबाई लगभग 232 किलोमीटर है।
- वित्तीय वर्ष 2014-15 से 917 मौतें हुई हैं।
- पिछले तीन सालों में 111 लोग मरे और 309 घायल हुए।
- 2019-20 में वर्ल्ड बैंक की सहायता से 1 अरब नेपाली रुपये खर्च हुए।
- सड़क की खराब हालत और भूस्खलन सबसे बड़े खतरे हैं।
स्रोत: hindi.asianetnews.com


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