जगन मोहन रेड्डी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जिससे YSRCP की राजनीतिक रणनीति पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। उनके बयान को BJP से मोहभंग या INDIA गठबंधन की ओर कदम माना जा रहा है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल
YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने हाल ही में कहा कि उनकी पार्टी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया का समर्थन करने पर अफसोस है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रणाली त्रुटिपूर्ण है क्योंकि इसमें केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी का प्रभाव ज्यादा होता है। उनका मानना है कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होने चाहिए और तीनों को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।
उनके इस बयान के राजनीतिक महत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि YSRCP ने कांग्रेस या INDIA गठबंधन के साथ जाने का फैसला कर लिया है। फिलहाल यह अटकलों का विषय बना हुआ है।
2019 से 2024 तक NDA सरकार के विधेयकों का समर्थन
2019 से 2024 के बीच YSRCP के सांसदों ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर केंद्र की BJP-नीत NDA सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन दिया। हालांकि यह कोई औपचारिक गठबंधन नहीं था। 2024 के चुनाव से पहले BJP ने YSRCP के बजाय चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के साथ गठबंधन किया। आंध्र प्रदेश में BJP, TDP और जनसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा और अच्छा प्रदर्शन किया।
2024 के चुनाव में YSRCP को बड़ा झटका
आंध्र प्रदेश विधानसभा में 175 सीटों में से TDP, BJP और जनसेना गठबंधन ने 164 सीटें जीतीं, जबकि YSRCP केवल 11 सीटों पर सीमित रह गई। लोकसभा की 25 सीटों में से इस गठबंधन को 21 सीटें मिलीं, वहीं YSRCP को केवल चार सीटें मिलीं। यह परिणाम YSRCP की स्थिति के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
BJP से दूरी के बावजूद समर्थन की उम्मीद
चुनावी हार और BJP के TDP के साथ गठबंधन के बावजूद जगन मोहन रेड्डी ने NDA सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने की बात कही। उस समय YSRCP के पास कुल 15 सांसद थे। केंद्र में बहुमत के लिए NDA सरकार को ऐसे सहयोगियों का समर्थन जरूरी था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और राज्य हित के मुद्दों पर उनकी पार्टी का समर्थन जारी रहेगा।
हालांकि BJP की रणनीति में TDP की भूमिका अहम रही, जिससे YSRCP के BJP के साथ तालमेल की संभावनाएं सीमित दिखीं।
क्या 2029 से पहले बदलेगी YSRCP की रणनीति?
लगभग ढाई साल बाद जगन मोहन रेड्डी के हालिया बयान को उनकी भविष्य की राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे अपनी स्वतंत्र राजनीति पर पुनर्विचार करेंगे और 2029 के चुनाव से पहले नए राजनीतिक विकल्प तलाशेंगे। अभी तक कांग्रेस या INDIA गठबंधन के साथ कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि YSRCP INDIA गठबंधन में शामिल हो रही है। आगामी समय में उनके बयानों, संसदीय रुख और कांग्रेस के साथ संभावित संवाद पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।


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