योग शरीर और मन के लिए लाभकारी है, लेकिन बिना सही जानकारी और सावधानी के योगाभ्यास से गंभीर चोटें और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन करते समय सही नियमों का पालन करने की अहमियत पर जोर दिया है।
योगाभ्यास में सावधानी क्यों आवश्यक है
हर व्यक्ति के शरीर की बनावट और लचीलापन अलग होते हैं, इसलिए दूसरों को देखकर या बिना सही प्रशिक्षण के योग करने से मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में दर्द और गंभीर चोटें हो सकती हैं। यदि अभ्यास के दौरान अचानक तेज दर्द हो तो तुरंत योग बंद कर देना चाहिए।
साधारण आसनों में भी सावधानी जरूरी
पद्मासन जैसे सरल आसन में भी पैरों को जबरदस्ती मोड़ने से घुटनों और टखनों में मोच आ सकती है। पुराने घुटनों, कूल्हों या टखनों के दर्द वाले लोग इस आसन से बचें, क्योंकि लिगामेंट्स में चोट लगने का खतरा रहता है।
एडवांस्ड योगासनों में विशेष सावधानी
शीर्षासन और सर्वांगासन जैसे कठिन आसनों में गर्दन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे डिस्क हर्निएशन, नसों का दबाव, लिगामेंट्स टूटना और गर्दन फ्रैक्चर तक हो सकता है। मासिक धर्म, गर्भावस्था, चक्कर आना, तीव्र सिरदर्द या हाल ही में हुई सर्जरी के बाद ये आसन नहीं करने चाहिए।
प्राणायाम करते समय ध्यान रखें
प्राणायाम सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, लेकिन सांस रोकते समय क्षमता से अधिक रोकना मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी कर सकता है जिससे चक्कर आ सकते हैं। चिकित्सीय स्थिति वाले लोग बिना योग प्रशिक्षक के कुंभक जैसी क्रियाएं न करें।
योग में सफाई क्रियाओं का सही अभ्यास
नेति क्रियाएं जैसे जल नेति और सूत्र नेति नाक की सफाई के लिए प्रभावी हैं, लेकिन इन्हें गलत तरीके से करने पर संक्रमण, सिरदर्द और नाक में जलन हो सकती है। जल नेति करते समय मुंह से सांस लेना चाहिए और नाक में पानी रोकने से बचना चाहिए। हमेशा उबला गुनगुना पानी और सही मात्रा में नमक का उपयोग करें।
सूत्र नेति में सूत्र को धीरे और चिकनाई लगाकर डालना चाहिए, तेज या झटकों से डालने पर नाक की परत छिल सकती है और संक्रमण हो सकता है।


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।