दिल्ली की हवा दिवाली से पहले ‘‘गंभीर’’ स्तर के करीब पहुंच गई है, जहां कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ऊपर दर्ज किया गया है।
दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर
शुक्रवार को दिल्ली की हवा ‘‘बहुत खराब’’ से ‘‘गंभीर’’ श्रेणी के करीब पहुंच गई है। शहर के 58 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 26 पर AQI ‘‘गंभीर’’ श्रेणी में था, जबकि 31 केंद्र ‘‘बहुत खराब’’ और एक केंद्र ‘‘खराब’’ श्रेणी में था। पंजाबी बाग में सबसे खराब AQI 453, जहांगीरपुरी में 447 और रोहिणी में 444 दर्ज किया गया।
GRAP के तीसरे चरण के उपाय लागू
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं। इसके तहत निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं।
क्या दिल्ली की हवा ‘‘गंभीर’’ श्रेणी में जाएगी?
राष्ट्रीय राजधानी में अगले दिनों हवा ‘‘गंभीर’’ श्रेणी में पहुंचने की संभावना है। दिवाली के करीब वाहनों का धुआं और पराली जलाने के कारण प्रदूषण बढ़ सकता है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, 7 से 9 नवंबर के बीच हवा की गुणवत्ता ‘‘गंभीर’’ रहेगी, जबकि उसके बाद के छह दिनों में ‘‘गंभीर’’ और ‘‘बहुत खराब’’ के बीच उतार-चढ़ाव हो सकता है।
प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
दिल्ली में प्रदूषण फैलाने में परिवहन क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 17.9 प्रतिशत है, इसके बाद पराली जलाने का 13 प्रतिशत योगदान है। स्थानीय स्रोतों में ऊर्जा उत्पादन, उद्योग, कचरा जलाना, निर्माण कार्य, सड़क की धूल, घरेलू स्रोत और अन्य क्षेत्रों का भी प्रदूषण में हिस्सा है।
पड़ोसी जिलों का प्रदूषण में योगदान
पड़ोसी जिलों में सोनीपत का योगदान 7.3 प्रतिशत सबसे अधिक है, इसके बाद झज्जर 5 प्रतिशत, रोहतक 3.6 प्रतिशत, पानीपत 2 प्रतिशत और करनाल 0.9 प्रतिशत है। NCR के अन्य क्षेत्रों में गुरुग्राम, बहादुरगढ़ और झज्जर का भी प्रदूषण में योगदान दर्ज किया गया है।
पराली जलाने की घटनाएं और उनका असर
6 राज्यों में पराली जलाने की कुल 5,637 घटनाएं 15 सितंबर से 5 नवंबर के बीच दर्ज की गई हैं। पंजाब में 2,787, हरियाणा में 80, उत्तर प्रदेश में 456, राजस्थान में 1,039, उत्तराखंड में 192 और मध्य प्रदेश में 1,081 घटनाएं हुईं। दिल्ली में इस दौरान दो घटनाएं दर्ज हुईं।
वायु गुणवत्ता पर मौसम का प्रभाव
मौसम की प्रतिकूल स्थितियां जैसे कम वेंटिलेशन इंडेक्स और धीमी हवा की गति प्रदूषकों के फैलाव को रोक रही हैं। PM2.5 प्रदूषक सबसे प्रमुख हैं, जो श्वसन तंत्र के लिए खतरनाक माने जाते हैं।
स्रोत: tv9hindi.com


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