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गुरुवार, 5 नवंबर 2026
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अर्ध तितली आसन से कूल्हे और पेल्विक क्षेत्र में बढ़ता है रक्त प्रवाह

अर्ध तितली आसन से कूल्हे और पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे पाचन सुधारता है और जकड़न कम होती है।

अर्ध तितली आसन से कूल्हे और पेल्विक क्षेत्र में बढ़ता है रक्त प्रवाह

नई दिल्ली में योग के अर्ध तितली आसन को करने से कूल्हे और पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे शरीर की जकड़न कम होती है और पाचन सुधरता है। यह आसन खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं।

मुख्य तथ्य

  • अर्ध तितली आसन कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से को लचीला बनाता है।
  • यह आसन पेट के अंगों को उत्तेजित कर पाचन क्रिया में सुधार करता है।
  • लंबे समय तक बैठने से हुई मांसपेशियों की टाइटनेस को कम करता है।
  • घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट हो तो इस आसन से बचना चाहिए।

अर्ध तितली आसन का अभ्यास और फायदे

अर्ध तितली आसन, जिसे अंग्रेजी में 'हाफ बटरफ्लाई पोज' कहा जाता है, एक सरल और शुरुआती स्तर का योगासन है। इसमें एक पैर सीधा रखा जाता है और दूसरा पैर मोड़कर तितली के पंख की तरह फैलाया जाता है। यह आसन शरीर की जकड़न को दूर करने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान करता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पेट के अंगों को उत्तेजित करके पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। खासकर लंबे समय तक बैठने वाले लोगों के लिए यह आसन फायदेमंद है क्योंकि यह कूल्हों और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों की टाइटनेस को कम करता है।

रक्त प्रवाह और मांसपेशियों पर असर

जब अर्ध तितली आसन में बैठते हैं, तो कूल्हों के जोड़ पर हल्का खिंचाव पड़ता है जो जमा हुई जकड़न को खोलता है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से कूल्हों और पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है।

इस आसन की स्थिति में पेल्विक क्षेत्र की नसों और मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है और आसन छोड़ने पर ताजा ऑक्सीजन युक्त रक्त तेजी से पहुंचता है। इससे शरीर की थकान कम होती है और क्षेत्र में ऊर्जा का संचार होता है।

सावधानियां

अगर किसी व्यक्ति के घुटनों, टखनों या कूल्हों में गंभीर चोट या दर्द है, तो उसे अर्ध तितली आसन करने से बचना चाहिए। अभ्यास के दौरान शरीर पर ज्यादा जोर न डालें और अचानक झटका न दें।

स्रोत: deshbandhu.co.in

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