अयोध्या में दसवें दीपोत्सव समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की सरकार में रामभक्तों पर गोली चलवाई गई और संतों पर लाठीचार्ज हुआ, उन्हें अयोध्या आने से पहले माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए अतीत में अयोध्या का अपमान करने वालों को पश्चाताप करने की सलाह दी।
रामभक्तों और संतों से माफी की मांग
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग अयोध्या की गलियों को रक्तरंजित कर चुके हैं, वे अपने कृत्यों को भूल गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामभक्तों पर गोली चलवाने और संतों पर लाठीचार्ज कराने वाले अपने अतीत का जवाब दें। उनके इस बयान को सपा नेतृत्व के खिलाफ राजनीतिक हमला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अयोध्या को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताया और कहा कि यहां आने वाले सभी लोगों को रामभक्तों और संतों का सम्मान करना चाहिए। रामकथा पार्क में उनके भाषण के दौरान साधु-संतों और स्थानीय लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाकर समर्थन दिखाया।
अखिलेश यादव के दौरे से पहले बयान
योगी आदित्यनाथ के अयोध्या पहुंचने से लगभग एक घंटे पहले सपा के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को राम मंदिर दर्शन के लिए आने की घोषणा की थी। इस राजनीतिक माहौल में मुख्यमंत्री का बयान खासा महत्वपूर्ण माना गया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अखिलेश यादव का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके निशाने पर सपा की पिछली सरकार और उसके अयोध्या से जुड़े फैसले रहे। उन्होंने कहा कि जो कभी भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताते थे, उनका अयोध्या आना वैचारिक बदलाव और विजय का संकेत है।
अयोध्या के विकास और सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने अयोध्या के पुराने हालात और वर्तमान विकास की तुलना की। उन्होंने बताया कि पहले रामनगरी उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार थी, लेकिन अब यहां विकास के कई काम हो रहे हैं। अयोध्या धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं से भी मजबूत बन रही है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भगवान श्रीराम ने समाज को मर्यादा का संदेश दिया, लेकिन जो लोग आस्था से खिलवाड़ करेंगे, उन्हें सजा भुगतनी पड़ेगी।
कर्फ्यू और कानून-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का बयान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब अयोध्या में कभी कर्फ्यू नहीं लगेगा और कोई भी दंगा-फसाद करने की हिम्मत नहीं करेगा। उन्होंने भरोसा दिया कि संतों का अपमान या रामभक्तों पर गोली चलाने जैसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी। अयोध्या की धार्मिक पहचान, संतों का सम्मान और रामभक्तों की आस्था सरकार की प्राथमिकता है। दसवें दीपोत्सव के मंच से उनका यह संदेश धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।
स्रोत: deshbandhu.co.in


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।