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काठमांडू में विक्रम मिसरी से मिले बालेन शाह, भारत-नेपाल संबंधों में नया मोड़

काठमांडू में विक्रम मिसरी से मिले बालेन शाह, दोनों देशों ने आर्थिक पैकेज और सीमा विवाद पर चर्चा की।

काठमांडू में विक्रम मिसरी से मिले बालेन शाह, भारत-नेपाल संबंधों में नया मोड़

काठमांडू में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की। यह पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा है, जिसे शाह ने मार्च में पद संभालने के बाद अंजाम दिया। इस मुलाकात में पानी के संसाधन, ऊर्जा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

मुख्य तथ्य

  • बालेन शाह ने पहली बार द्विपक्षीय विदेश दौरा किया।
  • मई में मिसरी का प्रस्तावित दौरा बिना कारण रद्द हुआ था।
  • भारत ने अगस्त-सितंबर में बाढ़ राहत में 140 टन से अधिक सामग्री भेजी।
  • नेपाल ने भारतीय सहायता के तौर पर USD 2 बिलियन का आर्थिक पैकेज मांगा है।
  • कालापानी-लिपुलेख सीमा विवाद और गोरखा भर्ती पर भी चर्चा हुई।

मुलाकात के पीछे का कारण और पृष्ठभूमि

मई में विक्रम मिसरी का नेपाल दौरा अचानक रद्द हो गया था। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, यह इसलिए हुआ क्योंकि बालेन शाह ने विदेश मंत्री रैंक से नीचे के अधिकारियों से आमने-सामने बैठक करने से इनकार किया था। इस साल की शुरुआत में शाह ने अमेरिकी अधिकारियों से भी मुलाकात टाल दी थी।

हालांकि, भारत और नेपाल के बीच संपर्क लगातार बना रहा। जून में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की अध्यक्ष रबी लामिछाने नई दिल्ली गईं। इसके बाद जुलाई में शाह ने भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की, जो उनके पहले के रवैये से अलग था।

बाढ़ राहत से संबंधों में मजबूती

अगस्त में नेपाल में आई भयंकर बाढ़ के बाद भारत ने राहत सामग्री और विशेषज्ञों की मदद भेजकर सहयोग बढ़ाया। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 26 अगस्त से 19 सितंबर के बीच भारत ने 140 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी। इसमें बचाव दल, उपकरण और टनलिंग एक्सपर्ट शामिल थे।

सितंबर में बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में भारत की तारीफ की और हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म का प्रस्ताव रखा, जिसमें नेपाल, भारत और चीन शामिल हैं।

आर्थिक सहायता और सहयोग पर चर्चा

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने भारत से ग्रांट और लाइन ऑफ क्रेडिट के जरिए 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 18,786 करोड़ रुपये) से अधिक का आर्थिक सहायता पैकेज मांगा है। शाह और मिसरी ने इस प्रस्ताव पर बातचीत की।

नेपाल की वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने सुझाव दिया कि शाह के भारत दौरे के दौरान आर्थिक सहयोग की घोषणा हो सकती है। नई दिल्ली ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। नेपाल इस फंड का उपयोग बाढ़ से हुई क्षति की मरम्मत और ट्रांसमिशन लाइनों के पुनर्निर्माण के लिए करना चाहता है।

सीमा विवाद और गोरखा भर्ती पर वार्ता

मुलाकात के दौरान कालापानी-लिपुलेख सीमा विवाद पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, 2022 में शुरू हुई अग्निपथ भर्ती योजना के तहत नेपाल द्वारा भारतीय सेना में गोरखा भर्ती पर रोक लगाने का मुद्दा भी उठाया गया।

काठमांडू का तर्क है कि यह भर्ती योजना 1947 के तीन-तरफा समझौते के खिलाफ है, जो भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच है। शाह के दौरे से भारत के साथ आर्थिक सहयोग के अलावा इन मतभेदों पर भी बातचीत के नए अवसर खुलेंगे।

नेपाल-भारत रिश्तों के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण

यह मुलाकात हाल के महीनों में तनावपूर्ण संबंधों के बाद एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। भारत का नेपाल में बाढ़ राहत के लिए सहयोग और शाह का भारत दौरा दोनों ही देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही, सीमा विवाद और भर्ती जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

स्रोत: tv9hindi.com

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