अमेरिका में मध्यावधि चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इन चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत ने वाशिंगटन में सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल दिया है। इस नतीजे के बाद रिपब्लिकन पार्टी में दरारें गहराने लगी हैं और ट्रंप के बाद के नेतृत्व को लेकर नई जंग शुरू हो चुकी है।
रिपब्लिकन पार्टी में गुटबंदी तेज
ट्रंप की हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलग-अलग गुट बनाने में जुट गए हैं। पार्टी के अंदर ट्रंप के खिलाफ माहौल बन गया है, हालांकि ट्रंप अभी जनवरी 2029 तक राष्ट्रपति पद पर बने रहेंगे। संविधान के अनुसार वे तीसरा कार्यकाल नहीं ले सकते। लेकिन मध्यावधि चुनाव के परिणाम उनके राजनीतिक प्रभाव के खत्म होने की शुरुआत माने जा रहे हैं।
वेंस, क्रूज और रुबियो के बदलते तेवर
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और सीनेटर टेड क्रूज़ जैसे नेता भी अब ट्रंप के खिलाफ नजर आने लगे हैं। मार्को रुबियो, जो विदेश मामलों के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट हैं, ट्रंप के संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं और उनकी छवि अधिक पारंपरिक मानी जाती है। इसी तरह फ्लोरिडा के रॉन डेसेंटिस और टेक्सास के टेड क्रूज़ भी "ट्रंप के बाद के दौर" की चर्चाओं में अपनी जगह बना चुके हैं।
जे.डी. वेंस, जिन्हें ट्रंप का मुख्य उत्तराधिकारी माना जाता था, रिपब्लिकन नेशनल कमेटी (RNC) के वित्त अध्यक्ष के रूप में सक्रिय थे। लेकिन पार्टी की ऐतिहासिक हार और प्रशासन की आलोचना के कारण उनकी स्थिति अब जटिल हो गई है।
टेक्सास के सीनेटर टेड क्रूज़ ने रिपब्लिकन पार्टी की हार को "ब्लू सुनामी" और "वाटरगेट-स्तर का अस्वीकार" बताया है। उन्होंने कहा कि हार इसलिए हुई क्योंकि पार्टी के पुराने समर्थक डेमोक्रेट्स की तरफ चले गए हैं, न कि इसलिए कि वे घर पर रहे। यह हार पार्टी के अंदर मौजूद दरारों और सत्ता के नए केंद्रों के उभरने को दर्शाती है जो ट्रंप के दबदबे के नीचे दबे हुए थे।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और डेमोक्रेट्स का बढ़ता दबदबा
ट्रंप ने अपनी हार पर प्रतिक्रिया देते हुए खुद को इससे दूर रखा। उन्होंने "ट्रुथ सोशल" पर लिखा कि वे चुनाव मैदान में नहीं थे, अगर होते तो भारी बहुमत से जीतते। यह उनके पहले के आग्रह के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें उन्होंने मतदाताओं से कहा था कि मध्यावधि चुनावों को उनके लिए "प्रॉक्सी मुकाबला" समझें।
अब दोनों सदनों में बहुमत मिलने के कारण डेमोक्रेट्स के पास समन जारी करने और समितियों पर नियंत्रण की शक्ति आ गई है। वे ट्रंप द्वारा नामित लोगों को रोकने या उनकी प्रक्रिया धीमी करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा प्रशासन की नीतियों, ईरान युद्ध और पारिवारिक व्यावसायिक सौदों की जांच भी होने की उम्मीद है।
ट्रंप के बाद की चुनौती और भविष्य
ट्रंप के हटने के बाद उन्हें मुख्य चुनौती किसी विरोधी राष्ट्रपति उम्मीदवार से नहीं, बल्कि उनके आंदोलन के इर्द-गिर्द बन रहे नए राजनीतिक ढांचे से मिलने वाली है। 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ तेज हो गई है, लेकिन ट्रंप आसानी से गायब नहीं होंगे। उनके पास अभी भी अपनी बात रखने का बड़ा मंच और समर्थक मौजूद हैं, जो पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती देते रहते हैं।
2026 की डेमोक्रेट्स की "ब्लू वेव" ने उस दौर को खत्म कर दिया है जब ट्रंप का कार्यकाल बिना मजबूत संसदीय विरोध के चला। रिपब्लिकन पार्टी अब एक व्यक्ति के दबदबे से बाहर निकल रही है। बचा हुआ कार्यकाल पूरा करते हुए ट्रंप धीरे-धीरे "लेम-डक" (कमज़ोर और प्रभावहीन) राष्ट्रपति बन सकते हैं।
स्रोत: indiatv.in


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