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गुरुवार, 5 नवंबर 2026
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अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक जीत और भारतीय मूल उम्मीदवारों का प्रदर्शन

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की, एलन मस्क ने ₹4700 करोड़ खर्च किए, भारतीय मूल उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया।

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक जीत और भारतीय मूल उम्मीदवारों का प्रदर्शन

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत

अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारा झटका लगा जबकि भारतीय मूल के कई उम्मीदवार चुनाव में सफल रहे। एलन मस्क ने ट्रंप की पार्टी के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन इसका फायदा रिपब्लिकन पार्टी को नहीं मिला।

मुख्य तथ्य

  • डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा पर पूरा नियंत्रण हासिल किया।
  • एलन मस्क ने रिपब्लिकन चुनाव प्रचार पर ₹4700 करोड़ से अधिक खर्च किए।
  • भारतीय मूल के कई डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
  • अब्दुल अल-सईद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेट सदस्य बने।
  • सोशल मीडिया पर ट्रंप की हार को लेकर मीम्स वायरल हो रहे हैं।

एलन मस्क ने ₹4700 करोड़ खर्च किए, पर रिपब्लिकन पार्टी हारी

वाशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीर व्यवसायी एलन मस्क ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए 4,700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। यह रकम डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली पार्टी के प्रचार और चुनाव अभियान को मजबूत करने में लगाई गई। बावजूद इसके, मस्क की आर्थिक मदद के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी चुनाव हार गई।

भारतीय मूल के उम्मीदवारों का शानदार प्रदर्शन

मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों ने अपनी जीत से ध्यान आकर्षित किया। डेमोक्रेटिक पार्टी के अमी बेरा, रो खन्ना, सुहास सुब्रमण्यम और प्रमिला जयपाल प्रतिनिधि सभा के लिए पुनः चुने गए। पिया दांडिया ने पहली बार चुनाव जीतकर सदन में प्रवेश किया। अमी बेरा लगातार आठवीं बार चुने गए और वे अमेरिकी कांग्रेस में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय मूल के सदस्य बन गए हैं।

इसके अलावा, मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर फिर से चुनी गई हैं। टेक्सास विधायिका के लिए पूजा सेठी चुनी गईं, जो पहली भारतीय-अमेरिकी महिला और पहली एशियाई-अमेरिकी डेमोक्रेटिक महिला हैं।

अब्दुल अल-सईद सीनेट में इतिहास रचने वाले पहले मुस्लिम बने

कर्नाटक के भटकल से जुड़े अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन राज्य से चुनाव जीतकर अमेरिका की सीनेट में प्रवेश किया। वे इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। उनकी पत्नी सारा जकाकू के पिता भटकल के निवासी हैं। उनके दादा जुकाकू शम्सुद्दीन बी.डी. जत्ती सरकार में वित्त विभाग के उप मंत्री थे।

ट्रंप की हार पर सोशल मीडिया पर मीम्स का दौर

रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई मीम्स वायरल हो रहे हैं। इनमें एक मीम में ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी से कह रहे हैं, "ब्रो, मुझे भी ज्ञानेश दे दो।" विपक्ष इस पर आरोप लगा रहा है कि ज्ञानेश बीजेपी के पक्षपाती हैं और उन्होंने पार्टी को चुनाव जिताया है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता सोशल मीडिया पर ट्रंप का मजाक उड़ा रहे हैं और कह रहे हैं कि अगर ज्ञानेश कुमार वहां होते तो ट्रंप हारते नहीं। वकील प्रशांत भूषण ने एक पोस्ट में लिखा, "मोदी: क्षमा करें, मैं आपको ज्ञानेश नहीं दे सका।" वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पोस्ट किया कि अगर ज्ञानेश होते तो ट्रंप की यह हालत नहीं होती।

स्रोत: hindi.asianetnews.com

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