इज़राइल में 27 अक्टूबर को हुए आम चुनावों के अंतिम परिणाम केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोम सोहलबर्ग ने राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को बुधवार को सौंप दिए। परिणामों के साथ ही नई सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। इस स्थिति में अरब पार्टियों की भूमिका किंगमेकर की तरह हो सकती है।
चुनाव नतीजों को लेकर विवाद और जांच
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके सहयोगी चुनावी धोखाधड़ी के आरोप लगा रहे हैं और नतीजों को जारी करने पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। सोहलबर्ग ने कहा कि आरोपों की जांच जारी है, लेकिन अभी तक कोई ऐसी गड़बड़ी सामने नहीं आई जिससे पूरे चुनाव परिणामों को रद्द किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी नतीजों पर शक जताना लोकतंत्र के लिए खतरा है।
CEC ने 9,000 से अधिक मतदान केंद्रों की जांच की, जिसमें 250 से ज्यादा वकीलों ने हिस्सा लिया। 350 मतदान केंद्रों पर मतदान सामग्री की गहन समीक्षा भी हुई। समिति ने लगभग 3,600 शिकायतों की जांच की, जिनमें से अधिकांश लिकुड पार्टी द्वारा दर्ज कराई गई थीं। वे अरब समुदाय के मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं।
राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग की अपील और भूमिका
राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने राजनीतिक दलों से जल्द एक स्थिर सरकार बनाने की अपील की है ताकि देश की राजनीतिक अनिश्चितता खत्म हो सके। उन्होंने कहा कि वे नेसेट के चुने गए दलों से चर्चा करेंगे और तय करेंगे कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपनी है। राष्ट्रपति ने गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन का समय दिया है, जिसे जरूरत पड़ने पर 14 दिन बढ़ाया जा सकता है।
हर्ज़ोग ने शिन बेट, पुलिस और अन्य एजेंसियों के काम पर भरोसा जताया जो विदेशी दखल के आरोपों की जांच कर रही हैं। उन्होंने अरब समुदाय को बदनाम करने के खिलाफ चेतावनी दी और नस्लवादी टिप्पणियों की निंदा की। हर्ज़ोग ने कहा कि अरब समाज देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान देता है और उनकी इच्छा है कि वे समाज में घुल-मिल जाएं।
मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और अरब समुदाय की भूमिका
न्यायाधीश सोहलबर्ग ने मतदाताओं की इच्छा को सर्वोपरि बताया और कहा कि वोटिंग पर शक नहीं किया जाना चाहिए, खासकर अरब समुदाय में हुई वोटिंग पर। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम सभी पर लागू होंगे और सभी को उन्हें मानना होगा।
चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी बनी लेकिन बहुमत से पीछे रही। विपक्षी गुट, जिसका नेतृत्व पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट कर रहे हैं, ने भी बहुमत हासिल नहीं किया। अरब पार्टियों ने कुल 19 सीटें जीतकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदि कोई भी पक्ष सरकार बनाने में सफल नहीं होता है, तो अगले साल फिर चुनाव संभव हैं।
परिणाम और आगे की चुनौतियां
चुनाव परिणामों को मंजूरी देते हुए CEC ने कहा कि जांच में कोई बड़ी अनियमितता सामने नहीं आई है। हालांकि विदेशी दखल के आरोपों की जांच अभी जारी है। शिन बेट के अनुसार, विदेशी ताकतों ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए बड़ी रकम भेजी है, लेकिन पुलिस सूत्र इस बात की पुष्टि नहीं करते।
राजनीतिक स्थिति इस समय अस्थिर है और गठबंधन बनाने के लिए छोटी पार्टियों, खासकर अरब दलों की भूमिका अहम हो गई है। विपक्षी गुट ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है। इस सस्पेंस के बीच, राजनीतिक दलों की बातचीत और गठबंधन बनाने की प्रक्रिया देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
मुख्य बिंदु
- 27 अक्टूबर के इजराइल चुनाव के नतीजे राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग को सौंपे गए।
- किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, अरब पार्टियां किंगमेकर बनी हैं।
- लिकुड पार्टी ने चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया, लेकिन CEC ने जांच के बाद नतीजों को मंजूरी दी।
- राष्ट्रपति ने राजनीतिक दलों से जल्द सरकार बनाने की अपील की है।
स्रोत: livetimes.news


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