इंडोनेशिया में राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और अन्य प्रमुख हस्तियों की कथित अवैध फोन टैपिंग के मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस जनरलों को हिरासत में लिया गया है। यह घटना राजधानी जकार्ता में सामने आई और गिरफ्तारी मंगलवार देर रात हुई।
मुख्य तथ्य
- तीन पुलिस जनरल पर 2025-2026 के बीच अवैध वायरटैपिंग का आरोप।
- राष्ट्रपति, मंत्रियों और पत्रकारों के फोन नंबरों को बिना अनुमति सिस्टम में डाला गया।
- जकार्ता में 20,000 से अधिक सैनिकों की तैनाती की गई।
- अवैध डेटा हटाने का भी आरोप जांच में शामिल।
तीन वरिष्ठ पुलिस जनरलों पर आरोप
राष्ट्रीय पुलिस की आपराधिक जांच एजेंसी ने बताया कि हिरासत में लिए गए अधिकारियों में पूर्व राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख और राष्ट्रपति के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ जनरल लिस्ट्यो सिगित प्राबोवो, पुलिस कानूनी प्रभाग के प्रमुख इन्स्पेक्टर जनरल अहरी सोंता नासूतियोन और इन्स्पेक्टर जनरल एको हादी सांतोसो शामिल हैं।
इन पर गैर-कानूनी तरीके से संचार को रोकने, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक बिना अनुमति पहुंच बनाने और सबूत मिटाने का गंभीर आरोप है। पुलिस के अनुसार, उन्होंने अक्टूबर के अंत में अवैध रूप से सुनी गई बातचीत के डेटा को सिस्टम से हटाने का आदेश भी दिया था।
राजनेताओं, मंत्रियों और पत्रकारों की जासूसी
आरोप है कि आरोपियों ने नियमों का उल्लंघन कर राष्ट्रपति, कैबिनेट मंत्रियों, राजनेताओं, पत्रकारों और व्यापारिक दिग्गजों के फोन नंबरों को गैरकानूनी रूप से लॉफुल इंटरसेप्शन मैनेजमेंट सिस्टम (LIMS) में डाला। इसके लिए किसी आधिकारिक सत्यापन या कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
सरकार ने चेतावनी दी है कि इस तरह की अनधिकृत जासूसी को 'राजद्रोह या तख्तापलट के प्रयास' के रूप में देखा जा सकता है।
जकार्ता में सुरक्षा कड़ी, सेना की बड़ी तैनाती
इंडोनेशियाई सेना ने राजधानी जकार्ता में 20,000 से अधिक सैनिकों और कर्मियों को तैनात किया है। नौसेना संचालन सहायक व वाइस एडमिरल यान सोफियान ने बताया कि राजधानी के बाहर से सैनिकों का आना बुधवार से शुरू हुआ, जिससे कुल तैनात कर्मियों की संख्या 20,980 हो जाएगी।
इस तैनाती में मरीन, नौसेना इकाइयों के साथ जावा और लैम्पंग प्रांत के प्रशिक्षण केंद्रों और नौसैनिक अड्डों के सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा 13,140 कर्मियों को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें भी तैनात किया जा सके।
सशस्त्र बलों के प्रवक्ता मेजर जनरल मुहम्मद नस ने कहा कि यह तैनाती राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है।
स्रोत: livetimes.news


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।