तिब्बत और चीन में गुरुवार रात 8 बजे के बाद भूकंप के तीन तेज झटके महसूस किए गए, जिनमें सबसे बड़ा भूकंप रिक्टर स्केल पर 7.0 की तीव्रता का था। इस भूकंप के बाद दो और झटके आए जिनकी तीव्रता क्रमशः 5.2 और 5.0 थी। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।
भूकंप के झटके और उनकी तीव्रता
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 8:03 बजे तिब्बत में भूकंप आया जिसकी तीव्रता 7.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन की सतह से 173 किलोमीटर नीचे था। इसके 45 मिनट के अंदर दो और झटके आए, पहले चीन में 5.2 तीव्रता का भूकंप रात 8:30 बजे और फिर तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप रात 8:42 बजे महसूस किया गया।
भूगर्भीय स्थिति और पर्यावरणीय खतरे
तिब्बत का छिंगहाई-तिब्बत पठार कई प्रमुख नदियों जैसे ब्रह्मपुत्र का स्रोत है, जो कई देशों से होकर गुजरती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण इस पठार के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे इस संवेदनशील इलाके में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। यह पर्यावरणीय बदलाव निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय है।
पहले भी तिब्बत में भूकंप के झटके
इससे पहले 3 सितंबर को भी तिब्बत में रिक्टर स्केल पर 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जो दोपहर लगभग 1:46 बजे महसूस किया गया। उस भूकंप का केंद्र 31.479 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 80.370 डिग्री पूर्वी देशांतर पर जमीन की सतह से लगभग 14 किलोमीटर नीचे था।
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप
8 सितंबर को नेपाल में भी भूकंप आया था, जो उस समय हुआ जब 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए भीषण हिमस्खलन और बाढ़ के बाद राहत कार्य जारी थे। उस त्रासदी में घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं नष्ट हो गई थीं और हजारों लोग लापता हो गए थे।
भूकंप क्यों आते हैं?
पृथ्वी की सतह के नीचे सात टेक्टोनिक प्लेटें लगातार गतिशील रहती हैं। जहां ये प्लेटें टकराती हैं, वहां भूकंप आते हैं। टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने, टकराने या रगड़ने से ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो जब बहुत अधिक होती है तो पृथ्वी की सतह पर कंपन के रूप में महसूस होती है। भूकंप का असर सबसे ज्यादा उस क्षेत्र में होता है जहां प्लेटें आपस में टकराती हैं, लेकिन तेज भूकंप के झटके दूर-दूर तक महसूस किए जा सकते हैं।
रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता मापन
वैज्ञानिक भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग करते हैं। जब भूकंप होता है, तो पृथ्वी के अंदर से ऊर्जा की लहरें निकलती हैं, जिन्हें रिक्टर स्केल की मदद से मापा जाता है। इससे भूकंप की तीव्रता और केंद्र की स्थिति का पता चलता है।


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