नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को लेकर इंदिरा गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उस समय लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई थी और हैबियस कॉर्पस का अधिकार भी निलंबित किया गया था, लेकिन ये सभी कदम संवैधानिक रूप से उठाए गए थे। उन्होंने यह बात 1975 के आपातकाल और मौजूदा राजनीतिक हालात पर एक इंटरव्यू में कही। साथ ही, सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर भी आलोचना की और पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को हुए नुकसान की चिंता जताई।
आपातकाल के दौरान उठाए गए कदम और सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया
1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया था, जो करीब 21 महीने तक चला। इस दौरान नागरिकों के कई अधिकारों पर पाबंदी लगाई गई थी। सोनिया गांधी ने स्वीकार किया कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई, लेकिन उन्होंने कहा कि ये कदम संवैधानिक प्रावधानों के तहत उठाए गए थे।
सोनिया गांधी ने बताया कि उन्हें आपातकाल के बाद ही उस समय की गंभीर परिस्थितियों का पता चला। उन्होंने कहा कि उस वक्त देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक परिवहन को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। नौकरशाही और सशस्त्र बलों से भी सरकारी आदेशों की अवहेलना करने की अपील हो रही थी। ऐसे हालात से निपटने के लिए इंदिरा गांधी ने कार्रवाई की।
इंदिरा गांधी ने चुनाव कर विवाद का समाधान किया
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 1977 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल के बाद आम चुनाव कराने का फैसला लिया था, जिससे विवाद का समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी भी मांगी थी।
सोनिया गांधी के अनुसार, आज जब पीछे देखा जाता है तो उस दौर की घटनाओं को बेहतर नजरिए से समझा जा सकता है।
मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अब आम जनता भी इस नुकसान को महसूस कर रही है।
सोनिया ने उम्मीद जताई कि भविष्य में मतदाता लोकतांत्रिक व्यवस्था को फिर से मजबूत करेंगे और बेहतर शासन की वापसी का समर्थन करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के बाद भी लोकतांत्रिक संस्थाओं को पुरानी स्थिति में लाने में समय लगेगा और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर काम करना होगा।
संस्मरण पुस्तक में अपनी जीवन यात्रा साझा करेंगी सोनिया गांधी
सोनिया गांधी इन दिनों अपनी संस्मरण पुस्तक 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने बताया कि यह किताब केवल उनकी और राजीव गांधी की प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि भारत और राजीव गांधी के परिवार के साथ उनके जुड़ाव की कहानी भी है।
सोनिया गांधी के अनुसार, राजीव गांधी से विवाह के बाद उनका रिश्ता धीरे-धीरे उनके परिवार और भारत से गहरा होता गया, जिसने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरित किया।
इटली से भारत तक का सफर
पुस्तक में सोनिया गांधी ने अपने बचपन के दिनों का वर्णन किया है, जो युद्ध के बाद इटली में बीते। इसमें राजीव गांधी से मुलाकात, भारत आने और निजी जीवन के कठिन दौर का भी जिक्र है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने भारत को अपना घर बनाया और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू आपातकाल के इतिहास, कांग्रेस की राजनीतिक विरासत और मौजूदा केंद्र सरकार के बीच चल रही राजनीतिक बहस को फिर से सक्रिय कर गया है।
स्रोत: deshbandhu.co.in


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