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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी ने इंदौर में महिला छात्रों के हॉस्टल की कमी पर सवाल उठाए

राहुल गांधी ने इंदौर में महिला छात्रों के हॉस्टल न होने पर मोदी सरकार से जवाब मांगा और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने इंदौर में महिला छात्रों के हॉस्टल की कमी पर सवाल उठाए

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को महिला छात्रों के हॉस्टल की कमी को लेकर मोदी सरकार से जवाब मांगा। इंदौर में अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार के पास दीये जलाने के लिए पैसे हैं, लेकिन छात्राओं के हॉस्टल के लिए नहीं।

मुख्य बिंदु

  • राहुल गांधी ने महिला छात्रों के हॉस्टल की कमी पर चिंता जताई।
  • एक छात्रा ने बताया कि हॉस्टल न होने पर उसे महंगे PG में रहना पड़ता है।
  • कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था और नौकरियों पर सवाल उठाए।
  • गांधी ने कहा कि सिस्टम छात्रों से डरता है और अंधभक्त चाहता है।

राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर उठाए गंभीर सवाल

राहुल गांधी ने इंदौर में एक छात्रा की बात का जिक्र करते हुए कहा कि वह गांव से पढ़ाई के लिए आई थी लेकिन हॉस्टल न होने के कारण उसे महंगे पीजी में रहना पड़ता है। इसके लिए उसे लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और हर महीने किराए की चिंता रहती है। इसके चलते कई लड़कियां अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। गांधी ने नरेंद्र मोदी से पूछा कि दीये जलाने के लिए तो पैसा होता है, लेकिन हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?

कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि मोदी सरकार के पास PR इवेंट्स, डिज़ाइनर कपड़े, लग्जरी कारें, हवाई जहाज़ और स्किनकेयर के लिए पैसा है, लेकिन युवाओं की शिक्षा के लिए नहीं।

क्या है कांग्रेस की मुख्य शिकायत?

कांग्रेस ने कहा कि देश में सही इंफ्रास्ट्रक्चर, अच्छे टीचर, ट्रेनिंग, हॉस्टल और नौकरियां नहीं हैं। वर्तमान में युवाओं की डिग्री की असलियत लगभग बेमानी हो गई है। गांधी ने आरोप लगाया कि एक सड़े-गले सिस्टम ने खासकर शिक्षा क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया है और वह छात्रों को सवाल पूछने नहीं देना चाहता। इसके बजाय वह अंधभक्तों को बढ़ावा देता है जो नफ़रत फैलाते हैं।

छात्र और सिस्टम के बीच क्या है टकराव?

इंदौर में ‘सिस्टम बनाम छात्र’ विषय पर बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम छात्रों से डरता है क्योंकि वे सवाल पूछते हैं। वह चाहता है कि केवल अंधभक्त हों जो उसकी बात बिना सवाल के मान लें। उन्होंने बताया कि छात्र जिज्ञासु होते हैं और संस्थानों के कामकाज, भर्ती, परीक्षाओं और अवसरों पर सवाल उठाते हैं, जो सिस्टम के लिए चुनौती है।

स्रोत: livetimes.news

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