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पिनाराई विजयन ने केरल मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद समझौते को लेकर आरोप लगाए

पिनाराई विजयन ने केरल मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद समझौते में प्रक्रिया दरकिनार करने और जांच से बचने का आरोप लगाया।

पिनाराई विजयन ने केरल मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद समझौते को लेकर आरोप लगाए

केरल में जीएनए बिजली समझौते पर विपक्ष का विरोध

तिरुवनंतपुरम। केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने शनिवार को मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद समझौते को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने तय प्रक्रियाओं को दरकिनार कर केएसईबी और विद्युत नियामक आयोग के फैसलों को अनदेखा करते हुए यह समझौता आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री के फैसले पर उठे सवाल

पिनाराई विजयन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने जांच से बचने के लिए भ्रम और अस्पष्टता फैलाई है, जबकि उनसे इस विवादित समझौते से जुड़े गंभीर सवालों के जवाब मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सतीशन ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने सामने रखी गई फाइल के आधार पर अंतिम फैसला लिया।

विजयन ने बताया कि केएसईबी के प्रस्ताव को हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने के लिए क्यों ठुकरा दिया गया, जबकि उस प्रस्ताव की तकनीकी और वित्तीय जांच पूरी हो चुकी थी। उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय मंत्री ने आधिकारिक स्तर पर हिमाचल प्रदेश से बिजली खरीदने के पक्ष में अपनी राय भी दी थी।

विपक्ष ने की कई जानकारियां मांगा

विपक्ष के नेता ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री ने किस कानूनी या अन्य आधार पर जीएनए के प्रस्ताव को मंजूरी दी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केएसईबी ने सरकार को सूचित किया था कि इस समझौते से भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है और क्या मुख्य अभियंता ने इस संबंध में कोई विस्तृत जांच रिपोर्ट दी थी।

इसके अलावा, विजयन ने यह भी पूछा कि क्या केएसईबी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक राजामाणिकम के नोट से बोर्ड की आपत्तियां खत्म हो जाती हैं, क्योंकि सरकार ने केवल चुनिंदा पंक्तियां ही उद्धृत कीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था, तो पूरी फाइल और सरकार को मिला पत्र जनता के सामने क्यों नहीं लाया गया।

विद्युत नियामक आयोग की भूमिका पर सवाल

विजयन ने यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या राज्य विद्युत नियामक आयोग ने यह कहा था कि 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच ऊंची दरों पर बिजली खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर आयोग के निष्कर्ष गलत थे, तो सरकार ने इस पर क्या कानूनी कार्रवाई की।

अंत में उन्होंने यह जानना चाहा कि मुख्यमंत्री ने केएसईबी, विद्युत नियामक आयोग और विभागीय मंत्री की राय को नजरअंदाज करते हुए सीधे तौर पर जीएनए समझौते को आगे बढ़ाने का फैसला क्यों लिया।

स्रोत: deshbandhu.co.in

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