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ऑक्सफैम रिपोर्ट: अमीरी और जलवायु संकट में गहरा संबंध

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में अमीरों के निजी जेट और निवेशों को जलवायु संकट बढ़ाने वाली मुख्य वजह बताया गया है।

ऑक्सफैम रिपोर्ट: अमीरी और जलवायु संकट में गहरा संबंध

ऑक्सफैम की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के अमीरों के निजी जेट विमानों से कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन इतना अधिक है कि वे जलवायु संकट को बढ़ावा दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमीरों की जीवनशैली और निवेश जलवायु असमानता को गहरा कर रहे हैं।

मुख्य तथ्य

  • अमीरों के निजी जेट विमानों का उत्सर्जन दुनिया की आधी गरीब आबादी के बराबर नहीं है।
  • दुनिया की सबसे अमीर 10% आबादी कुल कार्बन उत्सर्जन का लगभग आधा हिस्सेदार है।
  • अमीरों के निवेश का 71% हिस्सा जलवायु के लिए हानिकारक क्षेत्रों में जाता है।
  • जर्मनी के निजी जेट विमानों से सालाना 1,82,000 टन CO2 उत्सर्जित होता है।
  • अमीर लोग जलवायु आपदाओं से बेहतर बचाव कर सकते हैं, जबकि गरीब अधिक प्रभावित होते हैं।

अमीरों की जीवनशैली जलवायु पर कैसे असर डालती है?

ऑक्सफैम के अनुसार, अमीरों की जीवनशैली में भारी असमानताएं हैं। जर्मन ऊर्जा अर्थशास्त्री क्लाउडिया केम्फर्ट ने बताया कि दुनिया की सबसे अमीर 10 प्रतिशत आबादी कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार है। खासकर निजी जेट विमानों से उत्सर्जन बहुत अधिक होता है।

ऑक्सफैम की विशेषज्ञ लियोनी पीटरसन ने कहा कि निजी जेट विमानों से अधिक जलवायु को नुकसान पहुंचाने वाली कोई चीज नहीं है। निजी जेट विमानों से पिछले साल दुनिया भर में 1 करोड़ 60 लाख टन CO2 उत्सर्जन हुआ, जबकि जर्मनी में अकेले 55,000 से अधिक निजी जेट विमानों ने 1,82,000 टन उत्सर्जन किया।

अमीरों के निवेश और उनका प्रभाव

रिपोर्ट में 1,000 अरबपतियों के 1,095 कंपनियों में निवेश का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि 2025 तक उनका लगभग 71% निवेश तेल, गैस और रसायन जैसे जलवायु के लिए हानिकारक क्षेत्रों में जाएगा। इससे लगभग 48 करोड़ 60 लाख टन CO2 समतुल्य उत्सर्जन होगा।

जर्मनी के 49 अरबपतियों के निवेश से औसतन 7,05,000 टन CO2 उत्सर्जन होता है, जो अंतरराष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। क्लाउडिया केम्फर्ट ने बताया कि यह बात केवल जीवनशैली तक सीमित नहीं है, बल्कि अमीरों का पैसा कहां जाता है, उसका भी जलवायु पर बड़ा असर होता है।

जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता

ऑक्सफैम ने यह भी बताया कि अमीर लोग जलवायु आपदाओं से बेहतर बचाव कर सकते हैं क्योंकि वे कम जोखिम वाले इलाकों में रहते हैं और उनके पास आर्थिक बचत होती है। वहीं गरीब लोग असुरक्षित इमारतों में रहते हैं और आपदा के बाद आर्थिक मदद के बिना संघर्ष करते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिक असमानता वाले देशों में बाढ़ से मौतें कम असमानता वाले देशों की तुलना में 7 गुना अधिक होती हैं। क्लाउडिया केम्फर्ट ने कहा कि जो लोग ज्यादा CO2 उत्सर्जित करते हैं, वे खुद जलवायु संकट के प्रभाव से सुरक्षित रहते हैं जबकि गरीब सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

कैसे हो सकता है समाधान?

ऑक्सफैम का सुझाव है कि बड़ी संपत्ति और निजी जेट विमानों पर अधिक कर लगाया जाए। इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग जलवायु-अनुकूल अर्थव्यवस्था बनाने और संकट से निपटने के लिए करना चाहिए। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर देशों और गरीबों को पर्याप्त सहायता दी जानी चाहिए ताकि वे जलवायु संकट से बेहतर मुकाबला कर सकें।

संस्था ने कहा है कि जलवायु संरक्षण की लागत को इस तरह बांटना चाहिए कि कमजोर वर्गों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। ये मुद्दे भारत समेत अन्य देशों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत: hindi.webdunia.com

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