टकर कार्लसन ने नेतन्याहू के दबाव की बात कही
अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने बताया है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी राजनीतिक सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं। नेतन्याहू की कुर्सी बचाने और जेल जाने के खतरे के चलते वे ट्रंप को युद्ध के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
- नेतन्याहू का गठबंधन इजरायली चुनावों में बहुमत नहीं पा सका।
- टकर कार्लसन के अनुसार नेतन्याहू रोज ट्रंप को फोन कर दबाव बना रहे हैं।
- संभावित परमाणु हमले का निशाना मध्य ईरान का पिकाक्स पर्वत हो सकता है।
- ट्रंप 7 नवंबर तक ईरान पर हमला करने का फैसला कर सकते हैं।
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस युद्ध के खिलाफ हैं और समझौते की वकालत कर रहे हैं।
पिकाक्स पर्वत पर परमाणु हमले की योजना
कार्लसन ने बताया कि इजरायली खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पिकाक्स पर्वत में 300 फीट गहरी ग्रेनाइट की सुरंगों में ईरान का गुप्त परमाणु कार्यक्रम छुपा है। पारंपरिक हथियारों से इन सुरंगों को नष्ट करना मुश्किल है, इसलिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल एकमात्र विकल्प माना जा रहा है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप को इस हमले के कई विकल्प प्रस्तुत किए हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ भी नेतन्याहू के सख्त रुख का समर्थन कर रहे हैं।
अमेरिका की राजनीति और मिडटर्म चुनावों का असर
टकर कार्लसन ने कहा कि यह सभी घटनाक्रम अमेरिका के 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से जुड़े हैं। चुनाव से पहले ट्रंप एक "वॉर प्रेसिडेंट" की छवि बनाकर अपने समर्थकों और इजराइल समर्थित लॉबी का समर्थन हासिल करना चाहते हैं।
हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ युद्ध के खिलाफ हैं और ईरान से बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं।
अभी तक अमेरिकी सेना और इजराइल सरकार ने ईरान पर परमाणु हमला करने या कोई सैन्य कार्रवाई करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन ट्रंप 7 नवंबर तक इस विषय पर अंतिम फैसला ले सकते हैं।
परिणाम और वैश्विक असर
कार्लसन ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का ईरान पर परमाणु हमला विश्वभर में बड़े अस्थिरता का कारण बन सकता है। रूस ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करता है तो रूस को यूक्रेन पर इसी तरह के हमले की अनुमति मिल सकती है।
इसके अलावा, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अपनी परमाणु सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार कर सकते हैं। यह स्थिति तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत का संकेत हो सकती है, जो दुनिया के लिए गंभीर खतरा होगा।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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