मुख्य तथ्य
- करीब 90% वोटों की गिनती के बाद लिकुड को 26 सीटें मिलीं।
- सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत जरूरी है।
- नेतन्याहू के गठबंधन को अब तक 53 सीटें मिलने का अनुमान है।
- मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिल रही हैं।
- लिकुड की यह सबसे कमजोर स्थिति 2009 के बाद पहली बार देखी गई है।
चुनाव के शुरुआती परिणाम
27 अक्टूबर 2026 को हुए इजराइल के चुनाव में मतगणना के शुरुआती नतीजों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को अब तक सिर्फ 26 सीटें मिली हैं। यह संख्या 2009 के बाद पहली बार 30 से नीचे आई है। वोटों की गिनती लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, और आगे भी सीटों में बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है।
सरकार बनाने की चुनौती
इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें होती हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी होता है। नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन को अभी तक कुल 53 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिल रही हैं, जबकि अरब पार्टियों के लिए 19 सीटों का अनुमान है।
इस स्थिति में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो रहा है। इसलिए सरकार बनाने के लिए अन्य दलों का समर्थन लेना जरूरी होगा। नेतन्याहू के लिए यह चुनौती बड़ी है क्योंकि गठबंधन के सहयोगियों के बिना बहुमत पाना मुश्किल है।
लिकुड पार्टी का पिछला प्रदर्शन
लिकुड पार्टी ने पिछले चुनावों में ज्यादातर 30 या उससे ज्यादा सीटें हासिल की हैं। 2009 में पार्टी को 27 सीटें मिली थीं। इसके बाद 2013 में 31, 2015 में 30, अप्रैल 2019 में 35, सितंबर 2019 में 32, 2020 में 36, 2021 में 30 और 2022 में 32 सीटें मिली थीं।
2019 और 2020 के चुनावों में लिकुड ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन इस बार उसका प्रदर्शन काफी कमजोर दिख रहा है।
नेतन्याहू की लोकप्रियता और राजनीतिक स्थिति
लिकुड की सीटों में कमी को नेतन्याहू के सामने राजनीतिक चुनौतियों के रूप में देखा जा रहा है। सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सैन्य सेवा और सरकार के कामकाज जैसे मुद्दे इस चुनाव में प्रमुख रहे। मतदाताओं की नाराजगी का असर सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रदर्शन पर पड़ा है।
हालांकि, सीटों की संख्या ही पूरी तस्वीर नहीं दिखाती, क्योंकि चुनावी नतीजों पर गठबंधन की राजनीति, अन्य पार्टियों के प्रदर्शन और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी असर डालती हैं।
अगले कदम और संभावनाएं
अभी अंतिम नतीजों का इंतजार है कि लिकुड की सीटें कितनी रहेंगी और क्या नेतन्याहू बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाएंगे। 2009 के बाद पहली बार लिकुड को 30 से कम सीटें मिलने का अनुमान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
यदि नेतन्याहू को सहयोगी दलों का समर्थन नहीं मिलता, तो उन्हें नई रणनीति बनानी पड़ सकती है। हालांकि, लिकुड का सबसे बड़ी पार्टी बने रहना उनके लिए अहम माना जा रहा है।
स्रोत: tv9hindi.com


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