मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबेरेश्वरधाम में शरद पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर परिसर को खूबसूरती से सजाया गया है और दूर-दूर से भक्त भगवान के दिव्य स्वरूपों के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
भगवानों का विशेष श्रृंगार और प्रसाद
शरद पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर मंदिर में भगवान श्रीमुरली मनोहर के साथ भगवान शिव, प्रभु श्रीरामचंद्र और भगवान श्रीकृष्णचंद्र का विशेष और मनमोहक श्रृंगार किया गया है। रविवार की रात 7 बजे भगवान के दिव्य स्वरूपों के दर्शन होंगे। इसके साथ ही चंद्रमा की रोशनी में रखी जाने वाली विशेष चंद्र खीर का प्रसाद भक्तों को दिखाया जाएगा, जो इस रात को और भी खास बना देता है।
राधा नाम संकीर्तन और डांडिया महोत्सव
शाम 7:30 बजे से रात 9 बजे तक भव्य राधा नाम संकीर्तन का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त एक साथ भगवान के भजनों में लीन रहेंगे। इसके बाद रात में डांडिया महोत्सव रखा गया है, जिसमें श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में भगवान की भक्ति में नृत्य करेंगे।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने शरद पूर्णिमा की धार्मिक महत्ता बताते हुए कहा कि इस रात चंद्रमा अपनी पूरी सोलह कलाओं से युक्त होता है। शास्त्रों में माना जाता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत समान होती हैं। इसलिए लोग रात भर खुले आसमान के नीचे खीर रखकर चंद्रमा की किरणें उसमें पड़ने देते हैं और बाद में इसे प्रसाद मानकर खाते हैं।
विठलेश सेवा समिति की तैयारियां
इस आयोजन की व्यवस्था विठलेश सेवा समिति संभाल रही है। समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, पीने के पानी और दर्शन की कतारों के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी को कोई दिक्कत न हो।
उन्होंने दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर भगवान श्रीमुरली मनोहर के अलौकिक दर्शन करें और शरद पूर्णिमा के इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनकर पुण्य लाभ प्राप्त करें। समिति का अनुमान है कि इस बार हजारों की संख्या में भक्त इस धाम पर जुटेंगे।


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