पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में चल रही श्रीराम कथा के दौरान करवा चौथ को लेकर मजाकिया अंदाज में बात की। एक भक्त के सवाल के जवाब में उन्होंने करवा चौथ को "खसम पूजन दिवस" कहते हुए कहा कि पत्नियां एक दिन व्रत रखती हैं, लेकिन बाकी 364 दिन पतियों को ताने नहीं मारना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- करैरा में श्रीराम कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ पर टिप्पणी की।
- उन्होंने करवा चौथ को 'खसम पूजन दिवस' कहा।
- पत्नी एक दिन व्रत रखती हैं, बाकी दिन पति को ताने नहीं मारना चाहिए।
- पूर्व मंत्री इमरती देवी भी कथा में शामिल हुईं।
- शास्त्री ने पूरे साल पति-पत्नी के रिश्ते में सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री की करवा चौथ पर बात
एक भक्त के सवाल के जवाब में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि करवा चौथ पर पत्नियां पति की लंबी उम्र के लिए एक दिन व्रत रखती हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि बाकि 364 दिन पत्नियां पतियों को ताने देती हैं। इस पर उन्होंने कहा, “कहां से मिल गए, कौन से मुहूर्त में शादी हुई थी, इससे अच्छा तो हम ऐसे ही मर जाते।”
शास्त्री ने बताया कि करवा चौथ का व्रत सिर्फ एक दिन का काम नहीं होना चाहिए। पति-पत्नी को पूरे साल एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस शिद्दत से करवा चौथ पर प्रार्थना होती है, वही भावना पूरे वर्ष बनी रहनी चाहिए तभी व्रत सार्थक माना जाएगा।
श्रीराम कथा में इमरती देवी की उपस्थिति
शिवपुरी के करैरा में सात दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन भगवान श्रीरामलला के प्राकट्योत्सव का आयोजन धूमधाम से हुआ। इस दौरान मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री इमरती देवी भी कथा सुनने पहुंचीं। उन्होंने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लिया। कथा के दौरान शास्त्री ने भगवान श्रीराम के प्राकट्योत्सव से संबंधित बधाई गीत प्रस्तुत किए। इमरती देवी भी श्रद्धालुओं के साथ झूमती नजर आईं।
यहां भक्तों के सवाल-जवाब का सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें करवा चौथ को लेकर पूछे गए सवाल पर शास्त्री ने अपने विचार रखे। उन्होंने व्रत के साथ-साथ पति-पत्नी के रिश्ते में पूरे साल प्रेम और सम्मान बनाए रखने का संदेश दिया।
‘खसम’ शब्द का अर्थ
‘खसम’ शब्द का सामान्य अर्थ पति या शौहर होता है। यह शब्द हिंदी-उर्दू के साथ पंजाबी और उत्तर भारत की कई बोलियों में इस्तेमाल होता रहा है। पुराने लोकगीतों, कहावतों और फिल्मों में भी इस शब्द को सुना जा सकता है। हालांकि इसका भाव संदर्भ के अनुसार बदल सकता है।
स्रोत: mpbreakingnews.in


टिप्पणियाँ
इस खबर पर सबसे पहले अपनी टिप्पणी करें।