लखनऊ: उत्तर प्रदेश में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद लगभग 1.27 करोड़ ऐसे मतदाता हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है, जबकि वे पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में हैं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी हैं। इन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए चुनाव आयोग एक बड़ा अभियान चलाएगा। इस अभियान में विशेष ध्यान युवाओं और महिला मतदाताओं पर दिया जाएगा।
मुख्य तथ्य
- 55 लाख ऐसे मतदाता हैं जो सरकारी योजनाओं के लाभार्थी हैं लेकिन वोटर लिस्ट में नहीं हैं।
- 66 लाख मतदाताओं का नाम पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में है, लेकिन SIR के बाद की फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं है।
- चुनाव आयोग का अभियान विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 के तहत चलेगा।
- 18-19 साल के युवाओं और महिला मतदाताओं पर विशेष फोकस रहेगा।
- सरकारी विभागों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाएगा।
पंचायत और विधानसभा वोटर लिस्ट का मिलान
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में छूटे पात्र नागरिकों के नाम शामिल कराने के लिए पंचायत और नगरीय निकाय की मतदाता सूचियों का गहराई से मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया से ऐसे लोगों की पहचान होगी जिनका नाम विधानसभा की मतदाता सूची में नहीं है, लेकिन वे पंचायत या नगरीय निकाय की सूची में दर्ज हैं। ऐसे मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 भरवाया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे पहले से किसी विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल न हों।
राशन की दुकानों से पहचान
छूटे हुए मतदाताओं की पहचान के लिए राशन की दुकानों से भी मदद ली जाएगी। राशन कार्ड में दर्ज 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिकों को चिन्हित किया जाएगा, जिनका नाम मौजूदा विधानसभा मतदाता सूची में नहीं है। फिर उनका फॉर्म-6 भरवाकर मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया जाएगा।
युवाओं के पंजीकरण पर जोर
युवा मतदाताओं का पंजीकरण बढ़ाने के लिए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में मतदाता साक्षरता क्लब (ELC) को सक्रिय किया जाएगा। कक्षा 9 और उससे ऊपर के विद्यार्थियों में 18-19 साल के पात्र युवाओं की पहचान कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। इस काम में NSS, NCC, नेहरू युवा केंद्र, युवक मंगल दल और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स का सहयोग लिया जाएगा।
महिला मतदाताओं के नाम जुड़वाने के प्रयास
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों की तुलना में कम है। इस कारण सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे महिला कल्याण, बाल विकास, पुष्टाहार, स्वास्थ्य विभाग, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, एएनएम एवं समूह सखियों की सहायता लेकर घर-घर जाकर पात्र महिलाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ें।
आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र में भ्रमण करते हुए ऐसी महिलाओं को चिन्हित करेंगे जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। फिर उनके फॉर्म-6 भरवाकर नाम पंजीकृत कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूह की समूह सखियों के सहयोग से भी यह काम किया जाएगा।
अगले कदम और दिशा-निर्देश
चुनाव आयोग इस अभियान के लिए विभिन्न सरकारी विभागों का सहयोग लेगा और सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह अभियान 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि मानकर चलाया जाएगा और विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 के अंतर्गत होगा।
स्रोत: indiatv.in


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