भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी का दौर जारी रहा। 10 नवंबर को सुबह के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1668 अंकों की मजबूत बढ़त के साथ 78,969 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी 471 अंकों की बढ़ोतरी के साथ 24,432 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले 14 पैसे मजबूत होकर 94.32 पर पहुंच गया।
क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी कमी क्यों आई?
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई। इस घटना के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें दो महीने के निचले स्तर पर आ गईं और 94.09 डॉलर प्रति बैरल रह गईं। WTI क्रूड की कीमत भी 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर थी। वहीं, इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों का हाल कैसा रहा?
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। अमेरिकी शेयर बाजारों में नास्डैक 100 सूचकांक में 0.9 प्रतिशत की बढ़त आई, जबकि एसएंडपी 500 सूचकांक 1.6 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इसके अलावा, एशियाई शेयर बाजारों में भी गुरुवार को तेजी देखने को मिली।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
शेयर बाजार की इस तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों को फायदा हुआ है। तेजी से बाजार में सकारात्मकता बनी हुई है और डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती भी निवेशकों के लिए अच्छा संकेत है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े बाजारों पर असर पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु
- 10 नवंबर को सेंसेक्स 1668 अंक बढ़कर 78,969 पर पहुंचा।
- निफ्टी में 471 अंकों की तेजी दर्ज हुई।
- रुपया डॉलर के मुकाबले 14 पैसे मजबूत होकर 94.32 पर पहुंचा।
- क्रूड ऑयल की कीमतें दो महीने के निचले स्तर पर गिर गईं।
- अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से वैश्विक बाजारों में उत्साह बना।
स्रोत: hindi.webdunia.com


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